सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
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सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा

सावन प्रथम मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा

🛕 हिन्दू शास्त्र में सोलह का अर्थ है: चंद्रमा की सोलह कलाएँ। जब चंद्रमा पूर्ण होता है, सोलहों कला खिलती हैं। जब एक स्त्री सोलह श्रृंगार करती है: उसका सौभाग्य उसी पूर्णिमा की तरह पूर्ण होता है।
यह श्रृंगार देवी लक्ष्मी ने प्रकट किया था। माँ पार्वती ने इसे धारण किया था: शिव के लिए पहली बार: जब वे पत्नी बनकर कैलाश गईं। तब से यह परंपरा है: जो स्त्री माँ गौरी को सोलह श्रृंगार अर्पित करती है, वह केवल वस्तुएँ नहीं चढ़ाती। वह माँ की उस शक्ति का आह्वान करती है जिसने शिव को वश में किया था। और माँ उसी शक्ति का एक अंश अर्पण करने वाली की विवाह-भूमि में डालती है।
🔱 गौरी केदारेश्वर ही क्यों: यहाँ यह श्रृंगार सर्वाधिक प्रभावशाली क्यों है?
अन्य मंदिरों में माँ पार्वती की अलग मूर्ति होती है। गौरी केदारेश्वर में नहीं। यहाँ स्वयंभू शिवलिंग अर्धनारीश्वर लिंग है: एक भाग शिव का, एक भाग गौरी का। शिव और पार्वती: दो नहीं, एक। अभेद्य, अविभाज्य।
जब इस शिवलिंग के गौरी-स्वरूप पर सोलह श्रृंगार अर्पित होता है: वह माँ पार्वती तक सीधे पहुँचता है: उनके उस रूप में जो शिव में समाया हुआ है। यह अर्पण नहीं: यह माँ को उनका अपना श्रृंगार लौटाना है। उनकी भाषा में उनसे बात करना है। और काशी खंड का वचन है: हिमालय के केदारनाथ के सात बार दर्शन का पुण्य काशी के गौरी केदारेश्वर के एक बार दर्शन से प्राप्त होता है। यहाँ अर्पित हर वस्तु सप्तगुणित फलदायी है।
🌿 सावन का पहला मंगलवार: पूरे व्रत-चक्र की नींव
मंगला गौरी व्रत सावन के चारों मंगलवार को होता है: 4, 11, 18, 25 अगस्त। चार सप्ताह: एक चक्र। पहला मंगलवार इस चक्र का संकल्प-दिन है। पहले दिन जो भाव और सेवा माँ तक पहुँचती है, वह पूरे चार सप्ताह प्रवाहित होती रहती है। पहले दिन का सोलह श्रृंगार अर्पण सम्पूर्ण सावन भर माँ की श्रृंगार-शक्ति को आपके विवाह में सक्रिय रखता है।इसके अतिरिक्त, मंगलवार मंगल का दिन है। मांगलिक दोष, विवाह में बाधा, दांपत्य अशांति: इन सभी के लिए मंगला गौरी व्रत का पहला और सबसे प्रभावी दिन।
🙏 सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर माँ को संपूर्ण 16 शृंगार सामग्री अर्पित करें - अपने नाम संकल्प से माँ को प्रसन्न करें।
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