🕉️क़रीब15,000 वर्ष पूर्व गुरु पूर्णिमा महातीथि पर 84 वर्षों की तपस्या के बाद आदिगुरु शिव ने सप्तऋषियों को
ज्ञान दिया - उसी सिद्ध महातीथि पर आप भी स्वयं शिव 5 शिवलिंग पर अर्पण कर जीवन में ज्ञान का प्रकाश पाएँ।
🔴 गुरु पूर्णिमा और शिव यह संबंध सबसे प्राचीन और सबसे गहरा है
गुरु पूर्णिमा हम अपने शिक्षकों को याद करने के लिए मनाते हैं। लेकिन इस परंपरा का उद्गम वह क्षण है जब पहले गुरु ने पहले शिष्यों को ज्ञान दिया। वे पहले गुरु = शिव और वे पहले शिष्य = सप्तर्षि। "गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब शिवजी ने अपने प्रथम शिष्यों को ज्ञान का संप्रेषण कर गुरु-शिष्य परंपरा की स्थापना की।"
🔴 5 धाम 5 वरदान - 5 आयामों से शिव-कृपा
एक गुरु अपने शिष्य को 5 चीज़ें देता है: ज्ञान, कर्म-शुद्धि, पोषण, रक्षा और विजय। आदि गुरु शिव के 5 धाम = उन्हीं 5 वरदानों के 5 केंद्र:
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (ज्ञान):जीवन में दिशा, बुद्धि और ब्रह्म-संरेखण।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (कर्म-मुक्ति):पितृ दोष, काल-सर्प, कर्म-ऋण सब यहाँ
समाप्त होते हैं।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (पोषण-समृद्धि): घर में शांति और समृद्धि का वास।
महामृत्युंजय महादेव, काशी (रक्षा): अकाल मृत्यु से रक्षा + सभी रोगों का उपचार।
स्थाणेश्वर महादेव, कुरुक्षेत्र (विजय): वह भूमि जहाँ पाण्डवों ने श्रीकृष्ण के साथ महाभारत से पहले शिवजी की पूजा की और विजय प्राप्त किया।
🔴 गुरु पूर्णिमा पर 5 अभिषेक क्यों विशेष हैं?
गुरु पूर्णिमा = वह एकमात्र दिन जब आदि गुरु शिव सर्वाधिक "ग्रहणशील" होते हैं। आज वे गुरु-भाव में हैं भक्त के प्रेम को "शिष्य की पात्रता" की तरह देखते हैं। आदि गुरु को 5 जागृत धामों में अभिषेक करना = उनसे जीवन के 5 क्षेत्रों में आशीर्वाद प्राप्त करने समान है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 5 धामों पर एकसाथ गुरु पूर्णिमा अभिषेक:
ओंकारेश्वर, त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र), काशी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) एक ही दिन पाँचों पर
जाना असंभव है। श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आपके नाम और गोत्र से पाँचों धामों के प्रमाणित पुरोहित गुरु पूर्णिमा के सिद्ध मुहूर्त में पंच अभिषेक सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में।