शनि जयंती-शनिवार अमावस्या प्रदोष काल 108 दीपदान सेवा
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🪔 वह संध्या काल जो हर 13 वर्ष में एक बार आती है: जब सूरज ढलता है, उस संधि-वेला को हमारे पूर्वजों ने 'पितृ द्वार' कहा है। वह क्षण जब जीवित और दिवंगत के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है। इस संध्या वेला में शनि जयंती + शनिवार + अमावस्या तीनों एकसाथ हों। यही है 16 मई का दुर्लभ योग। वैदिक शास्त्रों में लिखा है: 'संध्या-दीपं शनेः प्रीतं पितृ-लोके प्रकाशते।' अर्थात - शनि को समर्पित संध्या का दीप पितृलोक में प्रकाश फैलाता है। जब 108 दीये एकसाथ जलते हैं, तो उस प्रकाश की लपटें सीधे आपके पूर्वजों की 'प्यासी आत्माओं' तक पहुँचती हैं। 🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे सम्पूर्ण पितृ-दीपदान: उज्जैन के श्री नवग्रह शनि मंदिर में - ठीक संध्या काल में - तिल के तेल से भरे 108 दीये प्रज्वलित किए जाएंगे। प्रत्येक दीप एक नक्षत्र का, एक जन्म का, एक ऋण का प्रतीक है। और जब 108वाँ दीप जलेगा - आपका कर्म-खाता शून्य हो जाएगा। 🙏 इस बार संध्या बेला में एक काम जरूर करें - अपने पितरों के लिए दीप जलाएं। वे इंतजार में हैं। आज ही '108 दीपदान सेवा' बुक करें।
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