हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा
हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा

हरियाली तीज गौरी केदारेश्वर सोलह शृंगार चढ़ावा

🛕माँ गौरी के 107 जन्मों की तपस्या के पश्चात जब शिव ने गौरी माँ को सावन में स्वीकारा तब माँ गौरी में हरियाली तीज के दिन ही पुनः 16 शृंगार किया था।
शिव पुराण की कथा के अनुसार - माँ पार्वती ने महादेव को पाने के लिए 107 जन्म लिए। हर जन्म में तपस्या की। हर जन्म में असफल रहीं, किंतु 108वें जन्म में हिमालय-राज की पुत्री के रूप में, वे भूखी रहीं, तूफान में खड़ी रहीं, वर्षा में भीगती रहीं, साध्वी के भेष में और जब शिव ने उन्हें स्वीकार किया, तो माँ पार्वती ने षोडश 16 श्रृंगार किया। वह दिन था सावन शुक्ल तृतीया। जिसे आज हम हरियाली तीज कहते हैं।
🛕षोडश श्रृंगार: 16 चंद्र-कलाओं की 16 शक्तियाँ:
षोडश का अर्थ है, सोलह। चंद्रमा की 16 कलाएं होती हैं, जब चंद्रमा सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, तो वह पूर्णिमा कहलाती है। वैसे ही जब माँ गौरी को 16 श्रृंगारों से सजाया जाता है, वह सम्पूर्ण गौरी-आराधना है। वंदना शास्त्र में वर्णित है: "षोडश श्रृंगार सहित माँ गौरी की आराधना -16 रूपों में माँ लक्ष्मी की एकसाथ आराधना है।" हर श्रृंगार एक विशिष्ट आशीर्वाद का द्वार है।
🔱 गौरी केदारेश्वर ही क्यों: यहाँ यह श्रृंगार सर्वाधिक प्रभावशाली क्यों है?
अन्य मंदिरों में माँ पार्वती की अलग मूर्ति होती है। गौरी केदारेश्वर में नहीं। यहाँ स्वयंभू शिवलिंग अर्धनारीश्वर लिंग है: एक भाग शिव का, एक भाग गौरी का। शिव और पार्वती: दो नहीं, एक। अभेद्य, अविभाज्य।
जब इस शिवलिंग के गौरी-स्वरूप पर सोलह श्रृंगार अर्पित होता है: वह माँ पार्वती तक सीधे पहुँचता है: उनके उस रूप में जो शिव में समाया हुआ है। यह अर्पण नहीं: यह माँ को उनका अपना श्रृंगार लौटाना है। उनकी भाषा में उनसे बात करना है। और काशी खंड का वचन है: हिमालय के केदारनाथ के सात बार दर्शन का पुण्य काशी के गौरी केदारेश्वर के एक बार दर्शन से प्राप्त होता है। यहाँ अर्पित हर वस्तु सप्तगुणित फलदायी है।
🙏 हरियाली तीज के दिन माँ गौरी को संपूर्ण 16 शृंगार सामग्री अर्पित करें - जीवन के 16 दिव्य महा आशीर्वाद पाएं - जो आपके कुल, वंश, दाम्पत्य जीवन में आपको अक्षय समृद्धि प्रदान कर सकता है।
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