🦚आ रहा है श्री कृष्ण का 5,253वाँ जन्मोत्सव! जब वृन्दावन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित मंदिर श्री बांके बिहारी जी के मुख्य पुरोहित आश्रित गोस्वामी जी - जो बिहारी जी को प्रतिदिन अपने हाथों से स्नान कराते हैं, उनका श्रृंगार करते हैं, उन्हें भोग लगाते हैं - वही हाथ जन्माष्टमी पर आपके लिए सेवा करेंगे!
स्वामी हरिदास जी जो स्वयं ललिता सखी के अवतार थे उन्होंने बिहारी जी की सेवा अपने प्रमुख शिष्य जगन्नाथ गोस्वामी को सौंपी और यह परंपरा आज भी उसी वंश में अखंड है।आश्रित गोस्वामी जी इसी पवित्र परंपरा के आज के उत्तराधिकारी हैं, श्री बांके बिहारी मंदिर के मुख्य पुरोहित। उनके हाथों में वह स्पर्श है जो सदियों से कृष्ण की सेवा में समर्पित है और यह परंपरा उस गर्गाचार्य कुल से आती है जिन्होंने बालकृष्ण का नामकरण-संस्कार किया था।
🛕ठाकुर श्री भाव बिहारी जी - गोस्वामी परिवार का निजी मंदिर:
'भाव बिहारी' वह नाम जो स्वयं एक दर्शन है। 'भाव' = शुद्ध दिव्य भावना - वैष्णव परंपरा में भक्ति की सर्वोच्च अवस्था। 'बिहारी' = जो उसमें विहार करे। अर्थात् वह कृष्ण जो भक्त की शुद्धतम भावनाओं में स्वयं प्रकट होते हैं। यह गोस्वामी परिवार का निजी मंदिर है - जहाँ जन-समुद्र की भीड़ नहीं, केवल शुद्ध भाव और व्यक्तिगत अर्पण होता है। जब आश्रित गोस्वामी जी अपने इस ठाकुरजी के सामने आपका नाम लेकर संकल्प करते हैं - वह सेवा किसी भीड़ में नहीं, आपके लिए अकेले होती है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे यह दुर्लभ सेवा संकल्प:
जन्माष्टमी पर वृन्दावन जाकर आश्रित गोस्वामी जी के हाथों से यह विशेष सेवा करवाना सबके लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से यह पवित्र संकल्प करवा सकते हैं। आश्रित गोस्वामी जी सम्पूर्ण विधि-विधान से जन्माष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में आपके नाम का संकल्प लेकर ठाकुर श्री भाव बिहारी जी को माखन-मिश्री भोग एवं पंचामृत अभिषेक सम्पन्न कराएंगे। भोग और अभिषेक का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 वर्ष में एक बार जन्माष्टमी का यह अवसर स्वामी हरिदास जी की परंपरा के उत्तराधिकारी, श्री बांके बिहारी मंदिर के मुख्य पुरोहित आश्रित गोस्वामी जी के पवित्र हाथों से भाव बिहारी जी की सेवा में सहभागी बनें - अभी बुक करें!