🪈राधाष्टमी - भाद्रपद शुक्ल अष्टमी का वह पावन मध्याह्न जब वृषभानुपुर की यज्ञ-भूमि में सुवर्ण कमल-पुष्प से एक शिशु का प्राकट्य हुआ। वह शिशु थीं - श्री राधा रानी, वृंदावन की महारानी, कृष्ण की आत्मा, समस्त लक्ष्मियों की मूल शक्ति। गर्ग संहिता कहती है - वे 'आयोनिजा' थीं, जो किसी गर्भ से नहीं, सीधे दिव्य कमल से प्रकट हुईं।
राधाष्टमी पर श्री राधा-कृष्ण चढ़ावा क्यों?
स्कंद पुराण की यह उद्घोषणा 'आत्मा तु राधिका तस्य' राधा, श्री कृष्ण की आत्मा हैं। जैसे कोई बिना आत्मा के जी नहीं सकता, वैसे ही कृष्ण राधा के बिना पूर्ण नहीं। बृहद गौतमीय तंत्र में भगवान स्वयं कहते हैं - 'राधिका परा-देवता' - राधा ही परम देवी हैं। पद्म पुराण कहता है - 'जैसे राधा विष्णु को प्रिय हैं, वैसे ही उनसे जुड़ी प्रत्येक वस्तु विष्णु को प्रिय है।' इसीलिए शास्त्र-परंपरा कहती है, 'पहले राधा को प्रसन्न करो - कृष्ण खुद प्रसन्न हो जाते हैं।' राधाष्टमी उनका जन्मदिन है ० यही वह दिन है जब उनकी कृपा का द्वार सबसे अधिक खुला होता है।
🛕श्री स्नेह बिहारी जी - स्थापना की दिव्य कथा:
🙏स्वामी हरिदास जी की दशम पीढ़ी के गोस्वामी श्री स्नेही लाल गोस्वामी जी की बड़ी इच्छा थी कि उन्हें कृष्ण जैसी ही संतान प्राप्त हो। एक रात्रि, स्वयं बिहारी जी ने स्वप्न में दर्शन दिये और आदेश किया- "अपनी गौशाला में जाओ। काली गाय के नीचे देखो।" श्री स्नेही लाल जी ने वैसा ही किया और उस काली गाय के नीचे की धरती से एक दिव्य श्री विग्रह प्रकट हुआ। त्रिभंग मुद्रा में, - वो मुद्रा जिसमें श्री राधा-कृष्ण का वास एकसाथ माना जाता है।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे वृन्दावन धाम में सेवा:
राधाष्टमी के पावन दिन वृन्दावन जाना भीड़, यात्रा, व्यवस्था - यह प्रत्येक भक्त के लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से श्री राधा स्नेह बिहारी जी के चरणों में जन्मोत्सव चढ़ावा अर्पित करवा सकते हैं। मन्दिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से संकल्प लेकर राधाष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में यह सेवा सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
✨🙏 "राधा-राधा रटत ही, भव-व्याधा मिट जाय।" राधाष्टमी का यह प्राकट्य दिवस वर्ष में एक बार आता है। इस दिन उनके अपने मंदिर में, उनके जन्मदिन पर, उन्हें विशेष भोग चढ़ाएँ और श्री राधा रानी की सीधी कृपा प्राप्त करें। अभी बुक करें!