🪔धनतेरस प्रदोष - वर्ष का वह एकमात्र प्रदोष जब एक दीप पूरे परिवार पर आने वाले हर संकट को द्वार से लौटा सकता है!
स्कन्द पुराण का यह श्लोक सहस्रों वर्षों से हर हिन्दू गृहस्थ के कण्ठ में जीवित है - "कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे। यमदीपं बहिर्दद्यात् अपमृत्युर्विनश्यति॥" अर्थात्: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की निशामुख वेला में घर के बाहर यम को समर्पित दीप प्रज्वलित करने से उनके द्वारा उत्पन्न हर संकट नष्ट होता है।
📖राजकुमार की रक्षा और यम दीपम् की पौराणिक कथा:
पुराणों में वर्णित है राजा हिम के पुत्र की जन्म-कुण्डली में विवाह के चतुर्थ दिवस सर्पदंश से मृत्यु लिखी थी। उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उस रात द्वार पर अपने सभी स्वर्ण-आभूषण और रजत-मुद्राएँ सजाईं और अनगिनत दीप जलाए। जब यमराज सर्प-रूप में आए, तो उन सहस्र दीपों के प्रकाश में चकित होकर ठिठक गए। वे रात-भर दीपों की आभा में बैठे रहे और प्रभात में लौट गए। उस एक रात के दीपों ने मृत्यु को द्वार पर रोक दिया। यही यम दीपम् का मूल है - एक दीप जो यमदेव को भी विनम्र करे।
🛕यमुना धर्मराज मंदिर क्यों यहाँ यम दीपम् सर्वाधिक प्रभावी है?
मथुरा के विश्राम घाट पर स्थित यमुना धर्मराज मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा तीर्थ है जहाँ यमराज (धर्मराज) और उनकी बहन यमुना देवी की काले पाषाण की दिव्य प्रतिमाएँ एक साथ विराजमान हैं। इस मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने किया लगभग 4,900 वर्ष पूर्व। घर की दहलीज़ पर दीप जलाना एक बात है किन्तु साक्षात् धर्मराज की प्रतिमा के सम्मुख, उनके अपने पवित्र धाम में, अपने नाम से दीप प्रज्वलित करना यह अनन्त गुना फलदायी है।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे यमुना धर्मराज मंदिर में यम दीपम्:
मथुरा जाकर इस प्रदोष मुहूर्त में स्वयं यम दीपम् करवाना हर किसी के लिए संभव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस पवित्र तीर्थ पर अपने नाम से यम दीप प्रज्वलित करवा सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से प्रदोष काल के सिद्ध मुहूर्त में (5:33 PM – 8:09 PM) दीप प्रज्वलन सम्पन्न करेंगे। जिसका वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏वर्ष का यह वह एकमात्र प्रदोष काल है जब एक दीप पूरे परिवार को हर संकट एवं भय से मुक्त कर सकता है। भारत के एकमात्र यम-यमुना तीर्थ पर यह सुरक्षा-दीप प्रज्ज्वलित करें!