पितृ पक्ष तृतीया स्वर्गद्वार भूमि पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष तृतीया स्वर्गद्वार भूमि पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष तृतीया स्वर्गद्वार भूमि पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा
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पितृ पक्ष तृतीया स्वर्गद्वार भूमि पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा

पितृ पक्ष तृतीया स्वर्गद्वार भूमि पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा

पितृ पक्ष की तृतीया और पुरी के स्वर्गद्वार तट पर एक दृश्य - जहाँ अग्नि और महासागर, पृथ्वी और आकाश, यह लोक और परलोक एक ही बिन्दु पर मिलते हैं। इस भूमि का नाम ही है - स्वर्गद्वार। स्वर्ग का द्वार। और इन 16 दिनों में यहाँ की जाने वाली प्रत्येक सेवा, पुरी के पंडा के हाथों से की जाने वाली प्रत्येक अंजल महोदधि की लहरों के साथ सीधे आपके पितरों तक पहुँचती है।
पुरी क्यों? - क्योंकि यहाँ पितरों को पितृलोक नहीं, वैकुण्ठ मिलता है!
स्कन्दपुराण की घोषणा है - 'मैं इस पुरुषोत्तम क्षेत्र में भगवान पुरुषोत्तम के रूप में स्वयं निवास करता हूँ, यहाँ बिताया एक दिन सम्पूर्ण तपस्याओं के पुण्य से बढ़कर है।' और पुराणों की वह महान् प्रतिज्ञा, जो किसी भी अन्य तीर्थ के बारे में नहीं कही गई - यहाँ का कीड़ा भी मृत्यु के पश्चात् भगवान के चतुर्भुज पार्षद का स्वरूप पाता है। जब यह भूमि यहाँ रहने वाले प्रत्येक जीव को वैकुण्ठ दे सकती है, तो यहाँ आपके पितरों के लिए की गई सेवा उन्हें कहाँ पहुँचाएगी।
पुरी के पंडा - हजारों वर्षों की अखण्ड सेवा-परम्परा के जीवित प्रतिनिधि!
पुरी के 'पंडा' साधारण पुरोहित नहीं हैं। ये वह वंश-परम्परा है जो भगवान जगन्नाथ के मन्दिर के प्रारम्भ से अखण्ड रूप से चली आई है। पुरी के पंडा केवल पुरोहित नहीं हैं - ये 'तीर्थ पुरोहित' हैं, जिन्हें आपके कुल की पितृ-सेवा का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। जब ये पंडा स्वर्गद्वार के तट पर नरेंद्र पुष्करणी के सामने आपके पितरों का संकल्प लेकर तर्पण और पितृ कार्य करते हैं, तो वे उस सनातन सम्बन्ध को जागृत करते हैं जो आपके वंश और जगन्नाथ के इस पवित्र क्षेत्र के बीच अनादिकाल से स्थापित है।
जब आप स्वर्गद्वार में तर्पण देते हैं - आपके पितर अनन्त में विसर्जित होते हैं
गरुड़ पुराण का वचन है, पितरों को जल-तर्पण = उनकी तृषा-शांति। किन्तु जब यह तर्पण पुरी के नरेंद्र पुष्करणी में दिया जाए, तो वह जल नहीं, समस्त तीर्थों की समाहित शक्ति लेकर पितरों तक पहुँचता है। पुराणों का वचन है, यहाँ किया श्राद्ध कार्य पितरों को 'शाश्वत तृप्ति' देता है - वे पीढ़ियाँ जो नर्क-कष्ट भोग रही हों, वे भी मुक्त होती हैं।
घर बैठे करें पुरी संपूर्ण पितृ शांति सेवा - श्री मंदिर के माध्यम से!
पितृ पक्ष में पुरी जाकर स्वर्गद्वार तट पर पितृ कार्य करवाना - प्रत्येक परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से आप संसार में कहीं से भी पुरी के प्रमाणित जात्री पंडा जी से यह सम्पूर्ण सेवा करवा सकते हैं। सम्पूर्ण सेवा पुरी की प्रमाणित वंश-परम्परा के पंडा जी द्वारा स्वर्गद्वार और जगन्नाथ मन्दिर में सम्पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न कराई जाएगी। सेवा का वीडियो प्रमाण 24 से 48 घंटों में आप तक पहुँचाया जाएगा।
16 पवित्र तीर्थ। 16 पवित्र तिथियाँ। केवल श्री मंदिर के साथ! इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक का नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।
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