🛕⭕️❗️⭕️ वह क्षण - जब भगवान खुद चलकर हमारे पास आते हैं। सोचिए उस दृश्य को - आषाढ़ की तपती धूप में, ढोल-नगाड़ों की गर्जना के बीच, जय जगन्नाथ! के उद्घोष से धरती थरथराती है - और विशाल रथ पर, महाप्रभु जगन्नाथ विराजमान होते हैं। वर्ष में केवल एक बार। और 9 दिन बाद - बाहुड़ा यात्रा - जब प्रभु घर लौटते हैं: यदि पहले दिन का भाव है - 'प्रभु आ रहे हैं!' तो बाहुड़ा यात्रा का भाव है वह जो हर माँ जानती है - जब घर का प्रिय बेटा 9 दिन बाद लौटता है, तो वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देती। वह थाली सजाती है। मिठाई बनाती है। ठीक इसी भाव से - 24 जुलाई को, बाहुड़ा यात्रा पर - भक्त का अर्पण प्रभु की 'घर-वापसी की भेंट' है।
📖 स्कंद पुराण की घोषणा - रथ पर अर्पण का अनंत फल:
स्कंद पुराण में वर्णित है - "रथ पर विराजमान प्रभु के समक्ष जो भी अर्पित किया जाए, वह मेरुदान के समान अनंत फलदायी है। रथ के दर्शन मात्र से करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।" और बाहुड़ा यात्रा के विषय में कहा गया है - "दक्षिण-मुख रथ पर लौटते प्रभु का दर्शन करने वाला भक्त मोक्ष को प्राप्त होता है - उसका पुनर्जन्म नहीं होता।" यह शब्द शास्त्र के हैं।
🛕 श्री जगन्नाथ मंदिर, कटारपा, कटक:
कटक की पावन भूमि पर स्थित इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा - तीनों दिव्य भाई-बहनों की उपस्थिति युगों से अनुभव की जाती रही है। यहाँ के रथ पर की गई हर भेंट - सीधे प्रभु के श्री-चरणों तक पहुँचती है।
📱 घर बैठे दोनों दिन अर्पण - श्री मंदिर ऐप के माध्यम से:
रथ यात्रा (16 जुलाई) और बाहुड़ा यात्रा (24 जुलाई) - दोनों दिन रथ पर भेंट अर्पित करना हर भक्त के लिए संभव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे - श्री जगन्नाथ मंदिर, कटारपा के प्रमाणित वैदिक पुरोहित द्वारा - आपके नाम का संकल्प लेकर सम्पूर्ण विधि-विधान से दोनों दिन अर्पित करवा सकते हैं। प्रत्येक दिन के अर्पण का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 प्रभु रथ पर हैं । यात्रा की विदाई में भेंट दें, और घर-वापसी पर स्वागत करें - दोनों दिन प्रभु के साथ रहें।