श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष संपूर्ण मनोरथ सेवा

इस कृष्ण जन्मोत्सव पर आपकी मनोकामना का सबसे सम्पूर्ण, सबसे शक्तिशाली कृष्ण-अर्पण करें - वृंदावन धाम एवं कृष्ण मठ उडुपी में अपने कान्हा को मनोरथ सेवा प्रदान करें - जो उन्हें सबसे अधिक प्रसन्न करती है!
🙏 'मनोरथ' - आपके मन का रथ जो सीधे कृष्ण तक पहुँचता है:
'मनोरथ' = मन + रथ। वह रथ जिस पर सवार होकर आपकी सबसे गहरी, सबसे पुरानी, सबसे असाधारण मनोकामना कृष्ण तक पहुँचती है। वैष्णव परंपरा में 'मनोरथ सेवा' वह सेवा है जो भक्त प्रेमभाव एवं संपूर्ण श्रद्धा के संग अपने प्रभु को समर्पित करता है।
🎽पहली सेवा - पोशाक मनोरथ सेवा: श्री स्नेह बिहारी बांके बिहारी, वृंदावन:
'स्नेह बिहारी' - वह नाम जो कहता है: यहाँ के कृष्ण प्रेम-स्नेह में रमते हैं। स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न होकर श्री श्यामा-श्याम स्वयं निधिवन से प्रकट हुए थे। जब कोई भक्त इन्हें पोशाक अर्पित करता है, वह माँ यशोदा के उस प्रेम को दोहराता है जब वे हर सुबह कन्हैया को नए वस्त्र पहनाती थीं।श्री वैष्णव परंपरा: "वस्त्र अर्पण भगवान की आराधना का सबसे अंतरंग रूप है।"
शास्त्र-वचन: "ठाकुर जी को पोशाक अर्पण करने से व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं होता।"पोशाक सेवा आयु, आरोग्यता, दारिद्र्य-नाश, बाधा-मुक्ति और इष्ट-कृपा का आशीर्वाद प्रदान करती है।
🍛दूसरी सेवा: 56 भोग राजभोग: श्री स्नेह बिहारी बांके बिहारी, वृंदावन:
श्री बांके बिहारी जी का स्वयं-प्रकट अनन्य बाल स्वरूप को उनके जन्मोत्सव के दिन 56 भोग सेवा का अर्पण कोई साधारण सेवा नहीं है। माँ यशोधा अपने कान्हा को दिन भर में 8 बार भोजन करवाती थी। जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन उठाया तब उन्होंने 7 दिनों तक कुछ नहीं खाया था, ऐसे में ब्रजवासियों ने 7 दिन पश्चात कान्हा को 7 दिनों में 8 बार भोजन के अनुसार 56 भोग अर्पित किए। ठीक यही प्रेम भाव आपके राजभोग में भी होगा - जो ब्रजवासियों ने दर्शाया था।
🌿 तीसरी सेवा - 25000 कृष्ण भक्तों को अन्नदान सेवा: श्री कृष्ण मंदिर, उडुपी:
13वीं शताब्दी में जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वारा स्थापित। यहाँ के कृष्ण ने कनकदास की भक्ति के लिए दीवार तोड़कर पश्चिम की ओर मुड़कर दर्शन दिए। यह है उडुपी के दया-स्वरूप कृष्ण। जो 800 वर्षों से यहाँ 'अन्न ब्रह्म' स्वरूप में विराजमान है। यहाँ भोजन सेवा करने का अर्थ है - साक्षात श्री कृष्ण को भोजन अर्पित करना।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे दोनों धामों में सम्पूर्ण मनोरथ सेवा:
वृंदावन और उडुपी दोनों धामों में एक साथ स्वयं जाकर तीनों सेवाएँ करवाना किसी के लिए भी असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से यह सम्पूर्ण संकल्प करवा सकते हैं। दोनों मंदिरों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से जन्माष्टमी के परम सिद्ध मुहूर्त में तीनों सेवाएँ सम्पन्न करेंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर।
🙏जन्माष्टमी का यह दुर्लभ संयोग वर्ष में एक बार आता है।तन, मन और धन - तीनों से 'सम्पूर्ण मनोरथ सेवा' में भागीदार बनें - और अपनी मनोकामना सीधे कृष्ण तक जाता है - अभी बुक करें! इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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