अधिक सोमवती अमावस्या सम्पूर्ण पितृ शांति 6 मोक्ष तीर्थ ब्राह्मण-पंडा महासेवा
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अधिक सोमवती अमावस्या सम्पूर्ण पितृ शांति 6 मोक्ष तीर्थ ब्राह्मण-पंडा महासेवा

🌑✨30 वर्षों में पहली बार - जब अधिक मास की अमावस्या सोमवार को पड़ती है!
शास्त्र कहते हैं - "पितृ ऋणम् अपाकृत्य न मुच्यते जन्म-बन्धनात्" - जब तक पितृ ऋण नहीं चुकाया, आत्मा जन्म-जन्मांतर के बंधन से मुक्त नहीं होती।
🤔 यह अवसर 30 वर्षों में एक बार क्यों है?
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) + अमावस्या + सोमवार - यह त्रि-योग लगभग 30 वर्षों में पहली बार आ रहा है। अधिक मास में किया गया प्रत्येक सत्कर्म तीन गुना फल देता है, अमावस्या पितरों की तिथि है जब उनकी आत्मा पृथ्वी लोक के सबसे निकट होती है, और सोमवार चन्द्रमा का दिन है - जो पितरों का स्वामी है। इन तीनों का एक साथ आना ऐसा दुर्लभ संयोग बनाता है जब एक दिन की ब्राह्मण-पंडा सेवा का फल पितृ पक्ष में पितृ सेवा के बराबर माना गया है।
🛕 6 मोक्ष तीर्थ क्यों - सम्पूर्ण पितृ ऋण शोधन:
हिन्दू शास्त्रों में पितृ कर्म के छह महातीर्थ हैं - गया (पितरों का सर्वोच्च क्षेत्र), मातृ गया-सिद्धपुर (माता की मुक्ति का एकमात्र स्थान), त्रिवेणी संगम-प्रयागराज (कुल की पीढ़ियों का उद्धार), काशी (जहाँ श्राद्ध से समस्त कुल मोक्ष पाता है), हरिद्वार (मोक्षदायिनी गंगा का द्वार) और गोकर्ण (दक्षिण काशी - सात जन्मों का मोक्ष)। इन छहों तीर्थों पर एक साथ सेवा से न केवल पितृ-मातृ दोनों पक्षों का पितृ ऋण शांत होता है, बल्कि ज्ञात-अज्ञात - सभी पितरों को मोक्ष मिलता है।
🪔 ब्राह्मण-पंडा सेवा क्यों - शास्त्र का प्रमाण:
गरुड़ पुराण में कहा गया है - "ब्राह्मणो भोजितः पूर्णं पितृभ्यस्तृप्तिमावहेत्" - अर्थात ब्राह्मण को भोजन कराने से पितरों को तृप्ति और मुक्ति मिलती है। ब्राह्मण और पंडा साक्षात् पितरों के प्रतिनिधि हैं - उन्हें भोजन, वस्त्र, श्वेत तिल, अन्न और फल अर्पण करना सीधे पितरों तक पहुँचता है।
🙏 इस दुर्लभ अधिक सोमवती अमावस्या के संयोग को न चूकें! अभी बुक करें - 6 मोक्ष तीर्थों पर सम्पूर्ण पितृ शांति ब्राह्मण-पंडा महासेवा में सहभागी बनें, अपने पितरों को मोक्ष दिलाएं और पितृ दोष से सदा के लिए मुक्ति पाएं।
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