शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा
शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा

शरद पूर्णिमा ऋण मुक्ति विशेष ऋण मुक्तेश्वर महादेव चढ़ावा

🔱बिना कुछ किए भी असाध्य पीड़ा, हर काम का बिगड़ना एवं सिर्फ़ सफलता हाथ लगना - कहीं कोई ऋण तो नहीं - कोई पितृ ऋण, देव ऋण या ऋषि ऋण। कुछ भी हो सकता है। - ऋणमुक्तेश्वर महादेव हर ऋण का हल हैं।
पांडवों का कष्ट और ऋणमुक्तेश्वर की कथा
महाभारत काल - पांडव धर्म के पथिक। फिर भी अज्ञातवास की पीड़ा। युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा: "हमने अधर्म नहीं किया फिर यह कष्ट क्यों?" कृष्ण का उत्तर आया: "यह तुम्हारा कर्म-दोष नहीं पितृ ऋण है। पूर्वजों के अधूरे दायित्व, अतृप्त आत्माएँ जब उनका ऋण चुका नहीं तो वंशज भुगतते हैं।"
कृष्ण ने पांडवों को ओंकार पर्वत पर भेजा नर्मदा-कावेरी संगम के तट पर जहाँ ऋणमुक्तेश्वर महादेव विराजते हैं। पांडवों ने यहाँ शिवलिंग स्थापित किया, तपस्या की। ऋणमुक्त हुए और उनका कष्ट समाप्त हुआ।
तीन ऋण जो हर मनुष्य के जन्म के साथ आते हैं
देव ऋण: जीवन, सृष्टि, वायु, जल देवताओं की देन। और चढ़ावे से यह चुकता होता है।
ऋषि ऋण: विद्या, ज्ञान, शास्त्र ऋषियों की विरासत। कृतज्ञता से यह उतरता है।
पितृ ऋण: पूर्वजों के बलिदान का ऋण। उनकी अतृप्त इच्छाएँ जब वंशज नहीं समझते तो रुकावटें, कष्ट और अकारण हानि होती हैं।
और आज के युग में: आर्थिक ऋण (कर्ज),भावनात्मक बोझ, कार्मिक दायित्व ऋणमुक्तेश्वर इन सभी से मुक्त करते हैं।
🌕शरद महा पूर्णिमा: यह तिथि क्यों है - ऋणमुक्ति का सर्वश्रेष्ठ अवसर?
संस्कृत में 'ऋण' का अर्थ है, जो बकाया है, जो चुका नहीं गया, जो अधूरा है और 'पूर्णिमा' का अर्थ है, जो भरा हुआ है, जो पूर्ण है, जिसमें कोई कमी नहीं। इसमें भी शरद पूर्णिमा वर्ष की वह एकमात्र पूर्णिमा जब चंद्रमा 16 कलाओं में सम्पूर्ण होकर अमृत बरसाता है, यह 'ऋण' की अपूर्णता के विरुद्ध 'पूर्णिमा' की सम्पूर्णता का सबसे प्रबल क्षण है। इसीलिए शरद पूर्णिमा पर ऋण मुक्तेश्वर महादेव की सेवा वर्ष का सबसे सिद्ध ऋण-मुक्ति उपाय है।
🛕भारत का एकमात्र शिव मंदिर जहाँ चने की दाल से ऋण मुक्ति मिलती है
ओंकार पर्वत परिक्रमा मार्ग पर नर्मदा और कावेरी के संगम पर एक स्वयंभू शिवलिंग है जिसका नाम है: ऋणमुक्तेश्वर वह ईश्वर जो ऋण से मुक्त करते हैं। यहाँ शिव के साथ देवगुरु बृहस्पति का भी वास है। बृहस्पति = धन, ज्ञान, समृद्धि का कारक। चना दाल = बृहस्पति का प्रिय अन्न। जब श्रद्धालु चना दाल चढ़ाते हैं। शिव और बृहस्पति दोनों प्रसन्न होते हैं। ग्रह-दोष शांत होते हैं। आर्थिक बाधाएँ हटती हैं।
🙏 युधिष्ठिर का कष्ट पितृ ऋण से था। आपका कष्ट किस ऋण से है - शायद आप जानते हों, शायद नहीं। दोनों स्थितियों में भगवान ऋणमुक्तेश्वर के चरणों में शीश झुकायें - ज्ञात अज्ञात सभी ऋणों से मुक्ति का मार्ग बनाएँ।
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अपनी सेवा चुनें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook