महानवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल 4 शक्तिपीठ महा चढ़ावा
महानवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल 4 शक्तिपीठ महा चढ़ावा
महानवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल 4 शक्तिपीठ महा चढ़ावा
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महानवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल 4 शक्तिपीठ महा चढ़ावा

🌺🔱 महाअष्टमी-महानवमी संधि काल वर्ष के सबसे शक्तिशाली 48 मिनट और इस क्षण में 4 शक्तिपीठों पर 'चतुर्महाशक्ति' का एकसाथ आह्वान!
समस्त नवरात्रि के नौ दिनों में, समस्त वर्ष के 365 दिनों में एक क्षण ऐसा आता है जो सबसे अलग है। वह क्षण है 'संधि काल' महाअष्टमी और महानवमी के बीच का संगम। शास्त्र कहते हैं जब दो तिथियों के बीच की 'संधि' (दरार) आती है न अष्टमी का प्रभुत्व रहता है, न नवमी का उस 48 मिनट में माँ की शक्ति अपने असंगठित, असीम, सर्वाधिक उग्र रूप में प्रकट होती है। यही है 'संधि काल' वर्ष के सर्वाधिक शक्तिशाली 48 मिनट।
🤔 संधि काल में क्या होता है? देवी माहात्म्य का प्रमाण:
देवी माहात्म्य (मार्कण्डेय पुराण) में लिखा है ठीक अष्टमी-नवमी के संगम पर माँ दुर्गा ने अपना सर्वाधिक उग्र स्वरूप माँ चामुण्डा धारण किया और चण्ड तथा मुण्ड असुरों का संहार किया। यही वह शक्ति है जो उस 48 मिनट में जागृत होती है। इसीलिए संधि पूजा में 108 दीप एकसाथ प्रज्वलित होते हैं, 108 कमल पुष्प अर्पित होते हैं, और चण्डी पाठ बिना रुके पढ़ा जाता है। 2026 में यह 48-मिनट का महाक्षण 19 अक्टूबर को ~10:27 से 11:15 AM IST पर है।
🌺 चतुर्महाशक्ति 4 शक्तिपीठ एकसाथ क्यों?
देवी के चार मूल स्वरूप हैं माँ महाकाली (संहार-शक्ति), माँ योगमाया (माया-शक्ति), माँ महाशक्ति/कात्यायनी (युद्ध-शक्ति), और माँ महालक्ष्मी (राज्य-शक्ति)। ये 4 शक्तिपीठ उन्हीं चार स्वरूपों के जागृत केंद्र हैं कालीघाट (महाकाली), विंध्यवासिनी (योगमाया), उमा कात्यायनी (युद्ध-शक्ति), अम्बाबाई महालक्ष्मी (राज-शक्ति)। जब संधि काल के उन 48 मिनट में चारों पीठों पर एकसाथ माँ को चढ़ावा अर्पित होता है सृजन + युद्ध + संहार + राजत्व = सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय दिव्य शक्ति का एकसाथ प्राकट्य। यही है 'चतुर्महाशक्ति संधि-कवच' जो पूरे वर्ष आपकी रक्षा करता है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 4 शक्तिपीठों पर संधि काल में चढ़ावा:
कोलकाता से कोल्हापुर, वृन्दावन से विंध्याचल एक ही दिन, एक ही 48-मिनट के क्षण में, चारों पीठों पर स्वयं जाना किसी के लिए भी सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे संधि काल के उन 48 मिनट में अपने नाम और गोत्र से चारों शक्तिपीठों पर चढ़ावा संकल्प करवा सकते हैं। प्रत्येक मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से जपा पुष्पांजलि, कुमकुम अर्चन और चुनरी महार्पण सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में।
🙏 संधि काल वर्ष में केवल एक बार और केवल 48 मिनट के लिए आता है। इन 4 शक्तिपीठों पर 'चतुर्महाशक्ति संधि-कवच' का यह अद्वितीय अवसर न चूकें। अभी संकल्प करें माँ चामुण्डा के प्राकट्य-क्षण में उनकी चारों महाशक्तियाँ एकसाथ प्राप्त करें।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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