🌸खाटू श्याम की सर्वोप्रिय दिन ग्यारस-बारस दोनों महातिथि पर उज्जैन खाटू दरबार में संपूर्ण आराधना करें। जीवन भर के लिए खाटू श्याम हारे का सहारा पाएं।
महाकाल की नगरी उज्जैन जहाँ काल विराजता है। इसी पावन भूमि पर श्री खाटू श्याम जी विराजते हैं, कलियुग के वह देवता जिनके बारे में स्वयं श्रीकृष्ण ने वरदान दिया था: "कलियुग में जो हारा होगा, थका होगा, जो हर जगह से ठुकराया होगा तुम उसके सहारे बनोगे।"
🤔 यह त्रि-देव महायोग इतना विशेष क्यों है?
सावन मास (भगवान शिव का प्रिय मास जिन शिव ने स्वयं बर्बरीक को अमोघ बाण देकर अजेय बनाया था) और ग्यारस-बारस खाटू श्याम की आराधना हेतु सर्वोच्च तिथि है जब खाटू दरबार से कोई भी भक्त अपने घर ख़ाली हाथ नहीं जाता है।
🛕बर्बरीक से 'हारे का सहारा' श्याम बाबा की अलौकिक कथा:
महाभारत काल में बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र को भगवान शिव की कठोर तपस्या से तीन अमोघ बाण प्राप्त हुए थे। उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी: "मैं सदा उसका साथ दूँगा जो हार रहा होगा।" यही उनकी अनूठी शक्ति थी। कुरुक्षेत्र में जब श्रीकृष्ण ने उनसे शीश माँगा, तो बर्बरीक ने एक पल भी नहीं लगाया अपना शीश अर्पित कर दिया।
प्रसन्न श्रीकृष्ण ने वरदान दिया: "कलियुग में मेरे ही नाम 'श्याम' से पूजे जाओगे। लाखों दोगे लखदातार कहलाओगे। जो हारे, थके, रोए सब तुम्हारे दरबार में आएँगे और खाली नहीं जाएँगे।"तभी से बाबा श्याम 'हारे का सहारा' हैं।
🌸 ग्यारस एवं बारस = सम्पूर्ण आराधना क्यों दोनों दिन जरूरी हैं?
शास्त्रों में एकादशी व्रत की सम्पूर्णता दो दिनों में होती है ग्यारस (एकादशी) और बारस (द्वादशी)। ग्यारस = संकल्प और अर्पण का दिन बाबा श्याम की पंचामृत सेवा, फूलबंगला श्रृंगार, माखन-मिश्री और चूरमे का भोग, श्याम पाठ और आरती। बारस = पारण और पूर्णता का दिन व्रत का समापन-संस्कार, बाबा के चरणों में कृतज्ञता का अर्पण। शास्त्र कहते हैं: "बिना पारण के एकादशी व्रत अधूरा है।" इसीलिए यह 'सम्पूर्ण आराधना' है जो न ग्यारस को छोड़ती है, न बारस को। यह दो दिनों का पूर्ण आशीर्वाद-चक्र है।
🙏सावन ग्यारस बारस पर श्री खाटू श्याम जी, उज्जैन में ग्यारस-बारस सम्पूर्ण आराधना में सहभागी बनें 'हारे का सहारा' श्याम बाबा से अपनी मनोकामना पूर्ति का सर्वश्रेष्ठ अवसर है यही। जय श्री श्याम!