🌕🔱 शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाएं पूर्ण होती हैं और उसी रात 'चंद्र के स्वामी' श्री सोमेश्वर महादेव, प्रयागराज का जल-बेलपत्र अभिषेक चंद्र दोष, मानसिक अशांति व रोग-निवारण हेतु सर्वश्रेष्ठ महा उपाय माना गया है।
शरद पूर्णिमा - जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं में वर्ष में एक बार पूर्ण रूप से प्रकाशित है। वह क्षीण नहीं, कुछ भी अधूरा नहीं सम्पूर्ण। इस एक रात चंद्र-किरणें अमृत बरसाती हैं, और चन्द्र के स्वामी सोमेश्वर महादेव को महाभिषेक में अर्पित जल की हर बूँद अमृत का काम करती है। इस दिन किया महाभिषेक कोई साधारण अभिषेक नहीं है, अमृत महाभिषेक माना जाता है।
🔱 शरद पूर्णिमा और सोमेश्वर दुर्लभ दिव्य संयोग:
सभी 12 पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा वह एकमात्र रात है जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं में एकसाथ प्रकट होता है ब्रह्म वैवर्त पुराण इसे 'अमृत वर्षम्' की रात कहता है। यह वह रात है जब चंद्र सर्वाधिक शांत एवं जागृत होता है और शिव-कृपा सर्वाधिक सक्रिय। जब सोम (चंद्रमा) पूर्ण हो, तभी सोमेश्वर की आराधना अपना परम फल देती है।
💧 जल-बेलपत्र अभिषेक सोमेश्वर को क्यों?
जल → चंद्र-तत्त्व है जल; जब हलाहल से व्याकुल शिव को देवताओं ने निरंतर शीतल जल अर्पित किया तभी से जल शिव को सर्वाधिक प्रिय है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्र-किरणें अमृत बनकर जल में उतरती हैं इस रात का जल ही अमृत-जल है, सोमेश्वर का जल-अभिषेक चंद्र-आधारित समस्त दोषों का शमन, मन की शीतलता, रोग-निवारण का आशीर्वाद प्रदान करता है।
बेलपत्रतीन लोब त्रिशूल, त्रिनेत्र, ब्रह्मा-विष्णु-महेश शिव का सर्वाधिक प्रिय पत्र। बेलपत्र शिव के समस्त स्वरूपों का एकसाथ आह्वान करता है, एक बेलपत्र सम्पूर्ण सृष्टि का समर्पण पाप-नाश, ताप-शमन, कृपा-प्रवाह है।
जल और बेलपत्र दोनों मिलकर शिव की 'बाह्य-शीतलता' (जल) और 'आंतरिक-तृप्ति' (बेलपत्र) दोनों को एकसाथ पूर्ण करते हैं इसीलिए जल-बेलपत्र अभिषेक सबसे प्रभावी और प्राचीन शिव-उपाय है।
🙏 शरद पूर्णिमा की यह रात वर्ष में एक बार आती है, यही वह क्षण है जब सोमेश्वर की कृपा सबसे अधिक प्रवाहित होती है। जहाँ स्वयं चंद्रदेव को शिव-कृपा मिली, उस पावन भूमि पर तीर्थराज प्रयागराज के सोमेश्वर महादेव का जल-बेलपत्र अभिषेक करें और चंद्र दोष, मानसिक अशांति एवं रोग-बाधाओं से शांति पाएं।