पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण
पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण

पितृ पक्ष द्वितीया यम धर्मराज चढ़ावा एवं यमुना तर्पण

गरुड़ पुराण में एक ऐसा वर्णन है जिसे पढ़कर हर वंशज स्तब्ध रह जाता है।यम-लोक का मार्ग 86,000 योजन लम्बा है। उस रास्ते पर कोई छाया नहीं। कोई जल नहीं, कोई भोजन नहीं। दस सूर्यों जैसी जलाने वाली गर्मी और कभी-कभी जमा देने वाली ठंड। इस मार्ग पर जब आत्मा चलती है - भूखी, प्यासी, थकी तब उसका एकमात्र भोजन वह होता है जो उसके वंशज उसे भेजते हैं तर्पण एवं यमदेव के हाथों।
और गरुड़ पुराण यह भी कहता है: उस यात्रा पर पितर पीछे मुड़कर देखते हैं। वे अपने परिजनों का नाम पुकारते हैं। "वे अपने परिवार के सदस्यों से प्रार्थना करते हैं कि उनके लिए प्रायश्चित और अनुष्ठान करें।"

⚖️ यम धर्मराज: आदि पितर - पितृ-पति
यमलोक एवं पितृलोक के स्वामी यमदेव भगवान सूर्य के पुत्र हैं। वे पहले मनुष्य थे जिन्होंने मृत्यु का अनुभव किया और इसीलिए सनातन धर्म ने उन्हें आदि पितर प्रथम पितर घोषित किया। समस्त पितरों के स्वामी पितृ-पति। उनके न्यायालय का वर्णन गरुड़ पुराण में इस प्रकार है: "यम धर्मराज की नगरी हीरों से जड़ी, तेजस्वी और अत्यन्त दृढ़ है।" चित्रगुप्त यहाँ समस्त जीवों के कर्मों का लेखा रखते हैं। और यम धर्मराज न्यायाधीश तय करते हैं कि आपके पितर किस मार्ग से जाएं।

गरुड़ पुराण की घोषणा है: "जो वंशज धर्म और श्रद्धा से पितृ-कर्म करते हैं - यम धर्मराज इतने प्रसन्न होते हैं कि वे अपने सिंहासन से स्वयं उठकर आगे बढ़ते हैं और उनका स्वागत करते हैं।" [1]
न्यायाधीश जब स्वयं सिंहासन छोड़कर आगे आएं - तब न्याय सदा अनुकूल होता है।

🌊 यमुना - यमराज की जुड़वाँ बहन मथुरा में
यमुना और यम एक ही माता-पिता की दो संतानें। भगवान सूर्य और माता संज्ञा के जुड़वाँ। ऋग्वेद में यमुना को 'यमस्य स्वसा' यम की बहन कहा गया है। यमुना मथुरा में प्रवाहित होती हैं, वह नगरी जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया, जो सप्त मोक्षपुरियों में से एक है।

जब आप मथुरा में यमुना के पावन जल में तर्पण करते हैं आप उस देवी की धारा में अर्पण करते हैं जो यमराज की जुड़वाँ बहन हैं। और यमुना-यम का यह दिव्य संबंध एक साथ दोनों की कृपा दिलाता है। बहन की प्रार्थना भाई कभी अस्वीकार नहीं करता।

🙏 86,000 योजन की यात्रा पर अपने पितरों के लिए सहायता भेंजे - उनके लिए अन्न-जल भेज तृप्ति प्रदान करें।

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