🌑✨ नवरात्रि तृतीया जब राहु की क्रूर दृष्टि से सम्पूर्ण मुक्ति एक ही दिन में सम्भव है दो पवित्र पीठों की शक्ति से!
आपके जीवन में कुछ बाधाएँ ऐसी होती हैं जो समझ नहीं आतीं काम बिगड़ता है पर कारण नहीं पता, नींद नहीं आती बिना वजह, पैसा आता है पर टिकता नहीं, छिपे दुश्मन काम बिगाड़ते हैं पर दिखते नहीं, मन में भ्रम और भय रहता है। यदि यह सब एक साथ हो रहा हो तो ज्योतिष शास्त्र कहता है यह राहु की 'क्रूर दृष्टि' का प्रभाव है।
🤔 राहु की क्रूर दृष्टि क्या है?
राहु = छाया ग्रह बिना शरीर के, केवल मस्तक जो चन्द्रमा को 'ग्रहण' (eclipse) लगाता है। जब कुण्डली में राहु की 'क्रूर दृष्टि' चन्द्रमा या अन्य शुभ ग्रहों पर पड़ती है मानसिक अशांति, अचानक हानि, छिपे दुश्मन, झूठे आरोप, काला जादू और काल सर्प दोष का सम्पूर्ण प्रकोप एकसाथ शुरू होता है। शास्त्र कहते हैं 'राहु-चन्द्र ग्रहण योग = सबसे कठिन' मानसिक उथल-पुथल, भय और अनिद्रा का मूल कारण।
🌙 तृतीया का दिव्य रहस्य माँ चन्द्रघण्टा और राहु:
नवरात्रि तृतीया = माँ चन्द्रघण्टा का दिन। उनका नाम ही बताता है सब चन्द्र + घण्टा = वह देवी जो चन्द्रमा को अपने मस्तक के मुकुट में धारण करती हैं। राहु की क्रूर दृष्टि चन्द्रमा पर पड़ती है और जब चन्द्रमा माँ चन्द्रघण्टा के मस्तक पर है राहु उसे छू नहीं सकता। माँ चन्द्रघण्टा की घण्टी की ध्वनि 'जिससे समस्त नकारात्मक ऊर्जाएँ और शत्रु-शक्तियाँ भाग जाती हैं' यही है राहु की क्रूर दृष्टि से मुक्ति का प्रमाण। तृतीया = वह एकमात्र दिन जब राहु की चन्द्र-दृष्टि माँ चन्द्रघण्टा के कवच से टकराकर लौट जाती है।
🔴 मंगलवार × तृतीया त्रि-शक्ति संयोग:
13 अक्टूबर 2026 मंगलवार। मंगलवार = माँ भद्रकाली का विशेष वार इसी दिन उनकी शक्ति अपने चरम पर होती है। जो माँ भद्रकाली की पूजा मंगलवार को करे, उसके जीवन की राहु-जनित समस्त बाधाएँ तत्काल नष्ट होती हैं। और नवरात्रि में यह मंगलवार = जब माँ दुर्गा की सम्पूर्ण शक्ति भी सक्रिय है। तीनों तृतीया + मंगलवार + नवरात्रि का एकसाथ आना वर्षों में एक बार होता है।
🛕 दो पीठ दो मोर्चे सम्पूर्ण राहु-मुक्ति:
श्री राहु पैठाणी मंदिर भारत का दुर्लभ, 200 वर्ष पुराना, केवल राहु को समर्पित मंदिर। राहु को उनके अपने पीठ पर पंचामृत, नील पुष्प और उड़द से शांत करना = राहु स्वयं अपनी क्रूर दृष्टि हटा लेते हैं।
श्री देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक, हरियाणा का एकमात्र शक्तिपीठ, जहाँ पांडवों ने महाभारत की विजय माँगी थी। माँ भद्रकाली = माँ काली का उग्रतम रूप जो राहु की दुष्ट ऊर्जा को तत्काल भस्म करती हैं। राहु शांत हो जाए फिर भी माँ का कवच जीवन भर सुरक्षा करता है।
🙏 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे दोनों पीठों पर एकसाथ चढ़ावा:
महाराष्ट्र और कुरुक्षेत्र दोनों पीठों पर एक ही दिन जाना किसी भी भक्त के लिए असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे नवरात्रि तृतीया के सिद्ध मुहूर्त में अपने नाम और गोत्र से दोनों पीठों पर चढ़ावा संकल्प करवा सकते हैं। प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से चढ़ावा सम्पन्न कराएंगे। दोनों मंदिरों से वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 नवरात्रि की यह तृतीया वर्ष में एक बार आती है और मंगलवार के साथ इसका संयोग वर्षों में एक बार। इस दुर्लभ अवसर पर राहु-पीठ पर राहु-शांति और भद्रकाली-पीठ पर काली-कवच दोनों एकसाथ करें। अभी संकल्प करें राहु की क्रूर दृष्टि से सम्पूर्ण मुक्ति प्राप्त करें।