प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा
प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा

प्रथम सावन सोमवार 3 शिव तीर्थ दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा

🔱महादेव के अपने माह सावन में उन्हीं के अपने दिन सोमवार पर उन्हीं की प्रिय नदियों गंगा (जो उनकी जटाओं से बहती है) शिप्रा (महाकाल नगरी की पाप नाशिनी जलधारा) एवं नर्मदा (शिव पुत्री) के घाट पर दीपदान करें एवं ज़रूरतमंदों को भोजन दें।
🔴 सावन का पहला सोमवार यह दिन क्यों है - शिव-सेवा का सर्वोत्तम अवसर?
सावन = शिव का प्रत्यक्ष शासन-काल। सोमवार = उनका अपना वार - सोम उनकी जटा में है। इस माह के पहले सोमवार को की गई सेवा - चाहे एक दीया हो, चाहे भोजन सेवा हो शिव पुराण के अनुसार अठारह प्रकार की मनोकामनाएँ पूर्ण करने का सामर्थ्य रखती है।
🔴तीन नदियाँ - तीन शिव-ऊर्जाएँ तीन अलग कृपाएँ
🌊गंगा, अस्सी घाट, काशी: काशी खंड कहता है - अस्सी घाट "सम्बेद तीर्थ" है, वह तीर्थ जो सभी तीर्थों का पुण्य एकसाथ धारण करता है। महादेव ने यहाँ अपने तांडव के बाद विश्राम किया, देवी दुर्गा की तलवार यहाँ गिरी। काशी में यहाँ एक दीया जलाना = काशीनाथ को प्रसन्न करने के समान।
🌊शिप्रा घाट, उज्जैन: समुद्र मंथन में जब अमृत की बूँदें पृथ्वी पर गिरीं उनमें से कुछ इसी शिप्रा के तट पर गिरीं। जिस नगरी में स्वयं काल-विजयी महाकाल का वास है, यह नदी उनकी सेवा में सदियों से तत्पर है।
🌊नर्मदा घाट: स्कंद पुराण का उद्घोष है - नर्मदा शिव के पसीने से जन्मी है।"नर्मदे पसीने विराजन्ते शम्भवः" — वह शिव की देह-जात नदी है। स्कंद पुराण: "नर्मदा के तट पर शिव की पूजा करने वाला पुनर्जन्म नहीं लेता।" यह गंगा से भी प्राचीन नदी है।
🪔शिव-तीर्थ पर दीपदान - स्कंद पुराण का वह वचन जो आपको चकित कर देगा
स्कंद पुराण में भगवान शिव स्वयं कहते हैं: जो शिव-तीर्थ पर सावन में एक दीप अर्पित करे उसे वही पुण्य मिलता है जो कैलाश पर साक्षात् मेरे सामने दीपज्योति जलाने से मिलता है। अग्नि पुराण: "देवालय या पवित्र तट पर दीपदान करने वाले को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते हैं।"
🥗ज़रूरतमंद सेवा - जब शिव स्वयं खाली कटोरा लेकर निकले थे
काशी की पुरानी कथा है। भगवान शिव ने कहा: "यह सब माया है।" माँ पार्वती अदृश्य हो गईं। अकाल पड़ा। शिव स्वयं भिक्षापात्र लेकर निकले। माँ पार्वती काशी में अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुईं और उन्होंने शिवजी के साथ सबको खिलाया। तभी से काशी में किसी भूखे को भोजन देना = साक्षात् महादेव को भोजन देने के समान है।
🪔🥗दीपदान + ज़रूरतमंद सेवा एकसाथ क्यों?
शिव-तीर्थ पर दीपदान = शिव-भक्ति का कर्म। ज़रूरतमंद को भोजन = अन्नसेवा का कर्म। दोनों एकसाथ = दो कर्म-धाराओं का एक ही संगम में मिलना जैसे गंगा-यमुना। जब भक्ति और करुणा एक साथ होें महादेव दोनों हाथों से आशीर्वाद देते हैं।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे - तीनों शिव-तीर्थों पर दीपदान एवं ज़रूरतमंद सेवा:
काशी, उज्जैन और नर्मदा - तीनों एक ही दिन पर स्वयं जाकर सेवा करना असंभव है। श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आपके नाम और गोत्र से तीनों घाटों के पुरोहित जी पहले सावन सोमवार के सिद्ध मुहूर्त में दीपदान और ज़रूरतमंद सेवा सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में।
🙏महादेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है यह - अभी उनके प्रिय स्थानों पर दीपदान एवं सेवा हेतु नाम दर्ज करें।
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अपनी सेवा चुनें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook