🪈श्री कृष्ण जन्मोत्सव से 5,000 वर्ष पूर्व मथुरा के अँधेरे कारागार में मध्यरात्रि को जगत के पालनहार स्वयं कृष्ण स्वरूप में शिशु बनकर प्रकट हुए थे - वही क्षण जन्माष्टमी पर पुनः वृन्दावन में जीवंत होता है। वर्ष के इस सर्वाधिक सिद्ध मुहूर्त कृष्ण के जन्मोत्सव पर उनके स्नेह बिहारी (पुत्र/बाल) स्वरूप को अर्पण करें।
🦚वृन्दावन की उस संकरी गली में जहाँ हर कदम पर राधे-राधे का नाद है, जहाँ पत्थर भी राधा-कृष्ण की साँस लेते हैं, उस पावन नगरी के एकमात्र स्वयं-प्रकट 'स्नेह-स्वरूप' बिहारी जी यहाँ 'प्रेमी' नहीं हैं, 'राजा' नहीं हैं, 'गोपाल' नहीं हैं - यहाँ वे 'लाल' (वात्सल्य प्रेम के प्रतीक) हैं।
🪷सम्पूर्ण वृन्दावन में, यह वात्सल्य-भाव नन्द-यशोदा का भाव (मातृ-पिता प्रेम) सर्वाधिक जागृत कहाँ होता है? श्री स्नेह बिहारी जी के चरणों में। क्योंकि यहाँ बिहारी जी स्वयं 'माँगे गये पुत्र' हैं। यहाँ भक्त और भगवान का सम्बन्ध माता-पिता और सन्तान का है, न दास और स्वामी का, न प्रेमी और प्रियतम का। जन्माष्टमी पर यहाँ चढ़ावा अर्पित करना अर्थात् नन्द-यशोदा बनकर अपने 'लाल' को स्नान कराना, माखन खिलाना, फूल पहनाना यही सच्ची जन्माष्टमी की सेवा है।
🛕श्री स्नेह बिहारी जी - स्थापना की दिव्य कथा:
🙏स्वामी हरिदास जी की दशम पीढ़ी के गोस्वामी श्री स्नेही लाल गोस्वामी जी की बड़ी इच्छा थी कि उन्हें कृष्ण जैसी ही संतान प्राप्त हो। एक रात्रि, स्वयं बिहारी जी ने स्वप्न में दर्शन दिये और आदेश किया- "अपनी गौशाला में जाओ। काली गाय के नीचे देखो।" श्री स्नेही लाल जी ने वैसा ही किया और उस काली गाय के नीचे की धरती से एक दिव्य श्री विग्रह प्रकट हुआ। त्रिभंग मुद्रा में, बांके बिहारी जी के समान, स्वयंभू। बिहारी जी ने स्वयं अपना एक अंश भेजा था - अपने भक्त की पुत्र-कामना का उत्तर देने के लिए।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे वृन्दावन धाम में सेवा:
जन्माष्टमी के पावन दिन वृन्दावन जाना भीड़, यात्रा, व्यवस्था - यह प्रत्येक भक्त के लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम और गोत्र से श्री राधा स्नेह बिहारी जी के चरणों में जन्मोत्सव चढ़ावा अर्पित करवा सकते हैं। मन्दिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से संकल्प लेकर जन्माष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में यह सेवा सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
✨यशोदा माँ ने जन्माष्टमी की रात अपने लाल को गोद में लेकर खिलाया था - आप भी आज अपने 'लाल' की सेवा में सहभागी बनें। यह अवसर वर्ष में एक बार आता है, श्री राधा स्नेह बिहारी जी के जन्मोत्सव महाचढ़ावा में अभी बुक करें ।