10 सिद्धपीठों में सामूहिक आराधना: 10 जाग्रत धामों की संयुक्त ऊर्जा से पूरे वर्ष का सुरक्षा कवच।
विक्रम संवत 2083 का शुभ आरंभ: हिंदू नव वर्ष का प्रतीक।
कालिका पुराण के अनुसार, समय की गणना साक्षात महाकाल का स्वरूप है। जब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की प्रथम किरण पृथ्वी का स्पर्श करती है, तब ब्रह्मांड की ऊर्जा शून्य से पुनः सृजन की ओर बढ़ती है। यह अपने प्रारब्ध को नए सिरे से लिखने का ईश्वरीय अवसर है।
विक्रम संवत 2083: ज्योतिर्विदाभरण और भविष्य पुराण के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य ने जब शकों को पराजित किया, तब उन्होंने एक ऐसी काल-गणना स्थापित की जो प्रकृति और नक्षत्रों के साथ चलती है। वर्ष 2026 जैसे विदेशी आंकड़ों को छोड़, अपनी जड़ों विक्रम संवत 2083 की ओर लौटना आध्यात्मिक शुद्धि का संकल्प है।
सर्व देव-देवता आराधना: पूर्ण सुरक्षा का महाकवच
नारद पुराण के अनुसार, विक्रम संवत के प्रथम दिन की आराधना किसी एक शक्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जीवन के हर क्षेत्र (स्वास्थ्य, धन, सुरक्षा और शांति) को साधने के लिए समस्त दिव्य सत्ताओं का सामूहिक आह्वान अनिवार्य है। इस शुभ आरंभ हेतु समस्त देव-देवताओं के जाग्रत केंद्रों पर आराधना करें।
🛕 पशुपतिनाथ मंदिर: महादेव के चारों मुखों से चारों दिशाओं की सुरक्षा
🛕 नरसिंह हनुमान: शत्रु बाधा और भय का शमन
🛕 गलता जी सूर्य मंदिर: नव वर्ष की प्रथम किरण के साक्षी सूर्यदेव से आरोग्य और तेज की प्राप्ति
🛕 दीर्घ विष्णु मंदिर: साक्षात श्रीहरि के प्राचीनतम स्वरूप से स्थिर लक्ष्मी का वरदान
🛕 शैलपुत्री दुर्गा मंदिर: मान्यातनुसार, माँ शैलपुत्री यहाँ स्वयं उपस्थित
🛕 अंबाबाई शक्तिपीठ: माँ सती के त्रिनेत्र यहाँ गिरे थे; धन-समृद्धि आशीर्वाद प्राप्ति का स्थल
🛕 खाटू श्याम मंदिर: कलियुग के देवता से हार पर जीत का आशीर्वाद
🛕 बड़ा गणेश मंदिर: रिद्धि-सिद्धि प्रदाता से अटके कार्यों की पूर्णता
🛕 नवग्रह शनि व नवग्रह शिला: पूरे वर्ष के लिए ग्रहों की प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदलने का रक्षा चक्र
विदेशी काल-गणना को छोड़कर, अपनी जड़ों की ओर लौटें। इस नव संवत्सर पर 10 जाग्रत धामों में अपनी शुभ आरंभ आराधना सुनिश्चित करें।







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