ब्रह्मांडीय ऊर्जा के चरम क्षणों को व्यर्थ न जाने दें! माघ मास की अंतिम दिव्य तिथि पर ब्रज की रज में गौ सेवा और विष्णु पद पर अर्पण कर पूरे माघ मास का पुण्य फल प्राप्त करें!
माघ मास की अंतिम और सबसे पावन तिथि माघी पूर्णिमा का फल तब दिव्य होता है, जब सेवा सीधे श्री हरि की जन्मस्थली ब्रज में अर्पित की जाए। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन किया गया चढ़ावा, आराधना एवं सेवा सात पीढ़ियों के संचित कष्टों को मिटाकर घर में अक्षय लक्ष्मी का वास कराती है।
✨ आपकी पावन ब्रज सेवा ✨
🔸 विष्णुपद वेदी पर चढ़ावा: पितरों की मुक्ति और सौभाग्य का द्वार
मथुरा स्थित भगवान विष्णु के चरणों की इस सिद्ध वेदी पर चढ़ावा अर्पित करना आपके कुल को पितृ दोषों से मुक्त करता है। यहाँ किया गया अर्पण सीधे वैकुंठ की कृपा आपके द्वार तक लाता है।
🔸 दीर्घ विष्णु मंदिर में सत्यनारायण कथा: संकटों का नाश, सुख का संचार
मथुरा के अति-प्राचीन दीर्घ विष्णु मंदिर में आपके नाम से की गई कथा आपके जीवन की बाधाओं को जड़ से मिटाती है। पूर्णिमा की रात्रि इस कथा से परिवार में शांति, समृद्धि और मानसिक स्थिरता आती है।
🔸 श्री धाम गौशाला में गौ सेवा: 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद
ब्रज की पावन रज में पल रही गौ माताओं को चारा खिलाना आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। गौ सेवा से बढ़कर माघी पूर्णिमा पर अन्य कोई पुण्य सेवा नहीं है।
यह अवसर क्यों है खास?
माघी पूर्णिमा माघ मास की पूर्णाहुति है। यह वह अंतिम क्षण है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है। यदि आप इस मास के स्नान-दान से वंचित रह गए हैं, तो ब्रज की यह संयुक्त सेवा आपके पूरे महीने की कमी को पूरा करती है।
🙏 माघी पूर्णिमा का यह महासंयोग अब अगले वर्ष ही आएगा! आज ही अपनी सेवा का संकल्प लें और श्री हरि के चरणों में अपना स्थान सुरक्षित करें!
इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।







श्री मंदिर चढ़ावा सेवा ऐप के जरिए, आपका चढ़ावा अनुभवी पुरोहितों द्वारा श्रद्धा पूर्वक अर्पित किया जाएगा, जिसका वीडियो 24-48 घंटों में प्राप्त होगा, जिससे आपको दिव्य आशीर्वाद और समृद्धि मिलेगी।
हवन आहुति दान एक अत्यंत पुण्यदायक कर्म है, जिसमें अग्नि के माध्यम से देवी-देवताओं को विशेष अर्पण अर्पित किया जाता है। इसमें शुद्ध घी, जौ, तिल, लकड़ी, हवन सामग्री आदि को मंत्रों के साथ अग्नि में समर्पित किया जाता है। यह आहुति न केवल वातावरण को पवित्र करती है, बल्कि साधक के पापों का क्षय, मानसिक शुद्धि और ग्रह दोषों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करती है!
आराधना सेवा वह भक्ति प्रक्रिया है, जिसमें श्रद्धालु किसी विशेष देवता की नियमित आराधना, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ, अर्पण या अभिषेक आदि के माध्यम से गहन श्रद्धा और नियमपूर्वक आराधना करता है। यह सेवा न केवल आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मनोकामना सिद्धि और ईश्वरीय कृपा का मार्ग भी खोलती है। आराधना सेवा से भक्त और भगवान के बीच एक दिव्य संबंध स्थापित होता है, जो जीवन के हर संकट में सहारा और मार्गदर्शन देता है।
सेवा बुकिंग के बाद आपको WhatsApp के माध्यम से अपडेट्स मिलते रहेंगे। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप के "सेवा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपनी सेवा की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
श्री मंदिर एक ऐसा एप्लिकेशन है जो भारत के 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों में घर बैठे सेवा बुक करने का अवसर प्रदान करता है। आप एक से अधिक सेवाएं चुन सकते हैं और इन्हें एक ही ऑर्डर में शामिल कर सकते हैं।
यदि आपकी सेवा में कोई भी समस्या हो, तो आप हमारी श्री मंदिर ग्राहक सेवा टीम से 💬7829661119 या 📞08071174417 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी सहायता के लिए हमेशा तत्पर है।
"हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।"
"हम स्वयं को चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो और वह संस्था प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत न हो। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट केवल तभी लागू होती है, जब दान प्राप्त करने वाली NGO के पास वैध 80G प्रमाणपत्र हो और उसने उसी के अनुरूप रसीद जारी की हो। हम किसी भी कर लाभ की गारंटी नहीं देते, जब तक कि उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित न किया गया हो। हमारे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, आप यह स्वीकार करते हैं कि आपका दान स्वैच्छिक है और आप स्वयं अपने दान से जुड़े कानूनी, कर एवं वित्तीय प्रभावों की पुष्टि करने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं।"