🌑✨ महारात्रि का वह निशीथ काल: जब तीन महाशक्तियाँ एक साथ जाग्रत होती हैं - माँ महाकाली। श्री कृष्ण एवं काल भैरव!
रात्रि का सबसे घना अन्धकार, चारों तरफ़ कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा होगा, और उसी मध्यरात्रि के सबसे शक्तिशाली 48 मिनट के पवित्र 'निशीथ काल' में माँ काली-कृष्ण एवं काल भैरव तीनों की शक्तियाँ अपने चरम पर होगी, हर बाधा, कष्ट, दोष को पल भर में ख़त्म करने का सामर्थ्य रखेंगी। ऐसे में तीनों को ठीक इसी समय इनकी शक्ति से जुड़े सिद्ध तीर्थों पर अर्पण करें और इनकी सर्वश्रेष्ठ कृपा प्राप्ति के पात्र बनें।
🔱 तीन देव: एक 'काल' - सम्पूर्ण सुरक्षा का रहस्य!
तीनों महाशक्तियों में एक अदृश्य धागा है - ‘काल'। भगवद् गीता 11.32 में स्वयं कृष्ण ने कहा "कालोऽस्मि लोकक्षयकृत् प्रवृद्धः" "मैं काल हूँ।" काली' नाम ही काल से उत्पन्न है, वे काल की स्वामिनी हैं। श्यामा-तंत्र परंपरा में काली को 'श्यामा' कहते हैं, वही नाम जो कृष्ण का है। दोनों श्याम-वर्ण, एक ही परमतत्त्व के दो रूप। देवी भागवत और रुद्रयामल तंत्र में लिखा है - महाभारत से पूर्व स्वयं श्रीकृष्ण ने माँ काली का आह्वान किया था और 'काल भैरव' काशी के कोतवाल जिनके बिना यमराज भी काशी में प्रवेश नहीं कर सकते। ये तीनों मिलकर 'काल-त्रय' बनाते हैं - काल से परे, काल की शक्ति से, काल के नियंत्रण में यह त्रि-शक्ति कवच किसी भी एक देव की आराधना से अनन्तगुना अधिक शक्तिशाली है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे जन्माष्टमी के निशीथ काल में तीनों धामों में एक साथ चढ़ावा
जन्माष्टमी के निशीथ काल में एक ही रात वृन्दावन, कुरुक्षेत्र और काशी - तीनों स्थानों पर जाकर चढ़ावा अर्पण करना किसी भी भक्त के लिए असम्भव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस महारात्रि त्रि-शक्ति सेवा में सहभागी हो सकते हैं। तीनों मंदिरों के प्रमाणित वैदिक पुजारी जी आपके नाम से संकल्प लेकर जन्माष्टमी के सिद्ध निशीथ काल में सम्पूर्ण विधि-विधान से चढ़ावा अर्पण करेंगे। तीनों मंदिरों से वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 वृन्दावन में बिहारी जी की जन्म-बेला में, कुरुक्षेत्र में माँ भद्रकाली की शक्ति-बेला में, काशी में काल भैरव की रात्रि-भ्रमण बेला में एक साथ त्रि-शक्ति चढ़ावा का यह अवसर वर्षों में एक बार आता है। इस महारात्रि में, इस एक सेवा में - नज़र दोष, शत्रु बाधा, तंत्र बाधा, काल सर्प दोष सबसे शांति का आह्वान करें और त्रि-शक्ति का अनन्त कवच प्राप्त करें।