पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति
पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति

पितृ पक्ष प्रतिपदा वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति

🔥वैश्वानर वह अग्नि है जो प्रत्येक प्राणी में, प्रत्येक लोक में, जीवित और पितृ-लोक में एकसाथ प्रज्ज्वलित है। जब आप वैश्वानर हवन में आहुति देते हैं, तो आप उस सार्वभौमिक अग्नि में अर्पण करते हैं जो इस लोक और पितृ-लोक के बीच सेतु का काम करते है - श्राद्धादि ब्राह्मण की इस वैश्वानर-अग्नि द्वारा सूक्ष्मकृत अन्न को पितरों के पास भेजा जाता है, चाहे वे पितृ-लोक में हों, अन्य लोक में हों, अथवा किसी अन्य योनि में हों।
🛕श्री दीर्घ विष्णु मंदिर - जहाँ वैश्वानर स्वयं विराजमान हैं
🦅गरुड़ पुराण - पितृ-मोक्ष का परम शास्त्र कहता है, पितृ-लोक का अधिष्ठाता, मोक्ष का दाता, गया-क्षेत्र का अधिपति सब विष्णु हैं। और वही भगवान विष्णु - गीता में स्वयं घोषणा करते हैं: "मैं वैश्वानर हूँ।" श्री दीर्घ विष्णु मंदिर में वैश्वानर हवन करने का अर्थ है - उसी देवता की उपस्थिति में आहुति देना जो स्वयं वैश्वानर हैं। यह एक प्रत्यक्ष दिव्य परिपथ है: भक्त → वैश्वानर हवन → भगवान विष्णु (जो स्वयं वैश्वानर हैं) → पितृ-मोक्ष। यहाँ अर्पण और अर्पण-ग्रहणकर्ता दोनों एक हैं।
🔥हवन की तीन पवित्र सामग्री - तीन ब्रह्माण्डीय सेतु

🍯घृत (गाय का शुद्ध घी) - अग्नि का पालक, सेतु का संरक्षक
ऋग्वेद का प्रथम मन्त्र है: 'अग्निमीळे पुरोहितम्' - अग्नि को समस्त देवताओं का पुरोहित, दिव्य मध्यस्थ कहा गया है। घी वह ईंधन है जो इस दिव्य पुरोहित को प्रज्ज्वलित रखता है। पितृ-देव-विज्ञान में घी से पोषित अग्नि दीर्घकालीन पितृ-लाभ उत्पन्न करती है - अग्नि की आयु जितनी अधिक, अर्पण उतनी दूर तक पहुँचता है।
⚫तिल (काला तिल) - पितृ-अनुष्ठान का अनिवार्य माध्यम
पितृ पक्ष का कोई अनुष्ठान तिल के बिना पूर्ण नहीं होता। तर्पण में तिल-युक्त जल, पिण्ड-दान में तिल-मिश्रित चावल, और अब हवन में तिल की आहुति। मनु स्मृति के अध्याय 3 में तिल को पितृ-श्राद्ध की अनिवार्य सामग्री कहा गया है। पुराणों में काला तिल शनि-पितृ अक्ष से संबद्ध है - शनि देव जो कर्मों का लेखा रखते हैं और पितरों की यात्रा निर्धारित करते हैं। हवन में तिल-आहुति = पितरों के कर्म-लेखे में शान्ति और पितृ-ऋण का शुद्धिकरण - अग्नि के माध्यम से।
🌾जौ (यव) - पृथ्वी का वैदिक बीज, तत्त्व-चक्र का समापन
जौ वैदिक काल का सबसे प्राचीन यज्ञ-अन्न है। मनु स्मृति अध्याय 3 में श्राद्ध के संदर्भ में यव(जौ) का उल्लेख है। जौ पृथ्वी-तत्त्व का प्रतिनिधि है जो अग्नि-तत्त्व में समर्पित होकर पंच-तत्त्व का चक्र पूर्ण करता है। जो पितर पृथ्वी से जुड़े थे, जिनके जीवन में भूमि-ऋण था, जो अभी भी भू-लोक से बंधे हैं - उनके लिए जौ की आहुति वह चाबी है जो उन्हें भू-बन्धन से मुक्त करती है।
🏠︎घर बैठे करें वैश्वानर पितृ शान्ति हवन आहुति - श्री मंदिर के माध्यम से
🪔पितृ पक्ष प्रतिपदा पर श्री दीर्घ विष्णु मंदिर में स्वयं उपस्थित होकर वैश्वानर हवन सम्पन्न करवाना प्रत्येक परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से संसार में कहीं से भी आप प्रमाणित वैदिक पुरोहितों द्वारा घृत, तिल और जौ की आहुतियों सहित सम्पूर्ण वैश्वानर पितृ शान्ति हवन विधि-विधान से सम्पन्न करवा सकते हैं। हवन का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
✨पितृ पक्ष की प्रथम तिथि, प्रथम आहुति - वैश्वानर अग्नि का प्रथम प्रज्ज्वलन, केवल श्री मंदिर के साथ - अभी बुक करें।
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