महालक्ष्मी स्वयं आएंगी आपके द्वार! शुक्र गोचर और शुक्रवार दिवस के महासंयोग पर धनलक्ष्मी-गजलक्ष्मी की आराधना कर पाएं धन, वैभव एवं समृद्धि का आशीर्वाद।
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को ऐश्वर्य, वैभव और सुख-संपदा का अधिपति माना गया है। शुक्र साक्षात लक्ष्मी तत्व का ग्रह है। 6 फरवरी को शुक्र का गोचर शुक्रवार के ही दिन हो रहा है, जो महालक्ष्मी का दिन है। यह एक ऐसा दुर्लभ मुहूर्त है जब शुक्र और लक्ष्मी की संयुक्त ऊर्जा ब्रह्मांड में सक्रिय होगी।
🔱 दो महाशक्ति धामों पर अर्पण का महत्व
🌸 अंबाबाई महालक्ष्मी शक्तिपीठ: करवीर पुराण के अनुसार, यहाँ माता सती के नयन गिरे थे। शुक्र ग्रह का संबंध भी दृष्टि और आकर्षण से है। इस दिन यहाँ चढ़ावा अर्पित करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और जातक के जीवन से दरिद्रता का समूल नाश होता है। यहाँ माँ अपने जाग्रत नेत्रों से भक्त की झोली भर देती हैं।
🌸 गजलक्ष्मी मंदिर: मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, माँ गजलक्ष्मी राजसी ठाट-बाट और विजय की अधिष्ठात्री हैं। शुक्र के गोचर काल में गजलक्ष्मी की आराधना करने से अटके हुए धन की प्राप्ति होती है, व्यापार में उन्नति होती है और व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान व राजसी सुख प्राप्त होते हैं।
✨ महालक्ष्मी अर्पण और गजलक्ष्मी आराधना के लाभ
शुक्रवार और शुक्र गोचर के इस संगम पर आराधना करने से कुंडली का शुक्र दोष शांत होता है और भौतिक सुख-सुविधाओं के द्वार खुलते हैं। यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो इन दो सिद्ध स्थानों पर किया गया अर्पण आपके लिए भाग्य-परिवर्तक सिद्ध हो सकता है।
🙏 समय सीमित है! शुक्र का यह शुभ गोचर आपके जीवन में समृद्धि की वर्षा कर सकता है। इस राजयोग मुहूर्त को व्यर्थ न जाने दें। महालक्ष्मी कोल्हापुर और उज्जैन गजालक्ष्मी धाम में अपना शुभ शुक्र गोचर अर्पण एवं आराधना अभी बुक करें!







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मंत्र जाप चढ़ावा एक विशेष धार्मिक सेवा है, जिसमें श्रद्धालु की ओर से किसी देवता के नाम का मंत्र नियत संख्या में जाप किया जाता है। यह जाप विशेषकर पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक चढ़ावा के साथ किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंत्र जाप चढ़ाने से भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, दोषों का निवारण होता है तथा दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है!
महाभिषेक एक विशेष और दिव्य प्रक्रिया है, जिसमें भगवान को अनेक पवित्र द्रव्यों जैसे पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, फूलों के जल, तिल या सरसों के तेल, इत्र, चंदन आदि से विधिपूर्वक स्नान कराया जाता है। यह अभिषेक भक्त की श्रद्धा से पूर्ण होता है और इसमें मंत्रोच्चारण के साथ भगवान की महिमा का गुणगान किया जाता है, जिससे भक्तों को आरोग्य, समृद्धि एवं मनोवांछित फल का आशीर्वाद प्राप्त होता है!
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