महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा
महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा

महा भरणी यमराज-विष्णुपद गया 21 पीढ़ी पितृ कुल उद्धार सेवा

🌟वर्ष में केवल एक बार - महा भरणी! पितृ-पक्ष का वह एकमात्र दिन जब यमराज का नक्षत्र पितरों के लिए साक्षात् प्रकट होता है।और पितृदेव विष्णु स्वयं मुक्ति के द्वार खोलते हैं। एक तरफ़ जहां यमराज = न्याय देते हैं। विष्णु = मुक्ति देते हैं, दोनों को एक ही दिन प्रसन्न करना = न्याय और मुक्ति दोनों एकसाथ। यही है पितृ कुल उद्धार की सम्पूर्ण प्रक्रिया।
पितृ-पक्ष के सोलह दिनों में एक दिन ऐसा आता है जो शेष सभी से असाधारण है, वह दिन जब चन्द्रमा भरणी नक्षत्र में होता है। भरणी = यमराज का अपना नक्षत्र। जब पितृ-पक्ष और यमराज का नक्षत्र एकसाथ आते हैं, उस दिन को महाभरणी कहते हैं। धर्मसिन्धु, हिन्दू धर्म-शास्त्र का सर्वोच्च संकलन ग्रंथ अटल घोषणा करता है: "भरण्यां श्राद्धं कृत्वा गयादानं लभते फलम्" "महा भरणी पर किया श्राद्ध = गया में पिंडदान का फल।" गरुड़ पुराण, मत्स्य पुराण - दोनों इसकी पुष्टि करते हैं।
⚖️ महा भरणी - यमराज के दरबार में सीधी पेशी:
आपके पितरों का भाग्य यमराज के हाथ में है। वे ही पितृ-लोक के अधिपति हैं। वे ही तय करते हैं कि आपके पितर किस योनि में हैं, कितने समय और रहेंगे, और उनकी मुक्ति होगी या नहीं। महा भरणी वह दिन है जब चन्द्रमा यमराज के अपने नक्षत्र में होता है, पितृ-पक्ष के शब्दों में: "यह ऐसा है जैसे याचिका न्यायाधीश के अपने न्यायालय में, उनके अपने दिन, साक्षात उनके सामने प्रस्तुत की जा रही है।"
श्री यमुना धर्मराज मंदिर में महा भरणी पर चढ़ावा = यमराज के अपने नक्षत्र पर, अपने एकमात्र मंदिर में उनकी आराधना। यह संयोग किसी अन्य दिन संभव नहीं।
🪷 श्री विष्णुपद वेदी, गया - 4 महापुराणों का एकमत:
गया की विष्णुपद वेदी पर वह काला पत्थर है जिसमें भगवान विष्णु के चरणों की छाप आज भी अंकित है। वह वही क्षण है जब विष्णु ने गयासुर पर अपना चरण रखा और उसे मोक्ष दिया और उस स्पर्श से यह भूमि पितृ-मुक्ति का सर्वोच्च द्वार बन गई। गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण, महाभारत और वाल्मीकि रामायण - ये चारों ग्रंथ एक साथ घोषित करते हैं: "विष्णुपद वेदी पर चढ़ावा और पिंडदान करने से 21 पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।" 21 पीढ़ियाँ आपके परदादा के परदादा से आज तक की पूरी वंश-परंपरा। जब आपका अर्पण विष्णु के चरणों तक पहुँचता है - वे स्वयं साक्षी, ग्राहक और मुक्तिदाता बनते हैं।
🙏 महा भरणी वर्ष में एक बार आती है। इस दिन अपनी 21 पीढ़ियो — जो आपसे पहले आए और जिनके कारण आप यहाँ हैं - उनके लिए मुक्ति द्वार खोलने में देर न करें - अभी विष्णुपद एवं यमुना धर्मराज में चढ़वा हेतु नाम दर्ज करें।
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