शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा
शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा
शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा
शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा
शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा
शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा

शरद पूर्णिमा महारास श्री कृष्ण 3 ठाकुर जी मंदिर माखन-मिश्री भोग सेवा

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाएं सृष्टि के 16 गुणों की अभिव्यक्ति हैं, और श्री कृष्ण वह परम-चेतना हैं जिनमें ये सोलहों कलाएं एकसाथ, पूर्ण और शाश्वत रूप से विद्यमान हैं। शरद पूर्णिमा वह रात है, जब आकाश का चंद्रमा और लीला के कृष्ण दोनों अपनी-अपनी 16 कलाओं में पूर्ण होते हैं और वह दिव्य मिलन ही महारास है।
🌕कहा जाता है कि चंद्रमा के अलावा श्री कृष्ण एकमात्र ऐसे देव हैं जो 16 कलाओं में निपुण माने जाते है, वो स्वयं चन्द्रवंशी कुल से भी थे। इसके अलावा शरद पूर्णिमा ही वह रात है, जब वृंदावन की गोपियों की लाखों वर्षों की तपस्या सफल हुई और विष्णु अवतार श्री कृष्ण ने उनके साथ महारास रच उनके भक्ति को सफल बनाया। साथ ही उन्हें जन्म- मरण के चक्र से मुक्ति दिलायी।
माखन-मिश्री का महाभोग ही क्यों?
श्री कृष्ण यज्ञ, अनुष्ठान एवं किसी भी मंत्र जाप से इतना प्रसन्न नहीं होते, जितना भक्तों के नाम से प्यार से चढ़ाया माखन खाकर होते हैं। श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध में एक ऐसा दृश्य है जो भगवान के स्वभाव को सबसे सरल शब्दों में बताता है, भगवान कृष्ण गोपियों की मटकी तोड़ते हैं, माखन चुराते हैं, हँसते हैं, नाचते हैं। वे माखन में लिपटे मुँह के साथ मुस्कुराते रहते हैं। यह माखन-चोरी केवल एक बच्चे की शरारत नहीं है - यह परब्रह्म का वह संदेश है: "मुझे राज-भोग नहीं चाहिए, मुझे वह माखन चाहिए जो प्रेम से बिलोया गया हो।"
🤔 ये 3 मन्दिर क्यों?
इन तीनों मन्दिरों में से प्रत्येक का कृष्ण के 'बाल-स्वरूप' से एक अनन्य और शास्त्र-प्रमाणित सम्बन्ध है। परन्तु सबसे महत्त्वपूर्ण बात इन सभी ठाकुर जी का सर्वप्रिय भोग एक ही है। वृन्दावन के स्नेह बिहारी हों या उडुपी के बाल-कृष्ण, या तिरुनेलवेली के गोपाल माखन-मिश्री वह एक धागा है, जो उत्तर-दक्षिण के कृष्ण-विग्रहों को एकता में बाँधता है। यह भोग संस्कृति, भाषा और सम्प्रदाय से परे है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 3 धामों में सेवा:
एक ही जन्माष्टमी पर वृन्दावन (उत्तर प्रदेश), उडुपी (कर्नाटक), तिरुनेलवेली (तमिलनाडु), इन सभी स्थानों की यात्रा करके माखन-मिश्री भोग अर्पित करवाना किसी भी भक्त के लिए असम्भव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से एक ही संकल्प में तीनों ठाकुर जी को माखन-मिश्री भोग अर्पित करवा सकते हैं। सभी मन्दिरों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से जन्माष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में यह सेवा सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏कृष्ण कन्हैया लाल को उनके जन्मोत्सव पर उनका सबसे प्रिय भोग लगाना मत भूलें - शरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी के 3 बाल स्वरूपों को 3 मंदिरों में उनका प्रिय माखन-मिश्री भोग अर्पित करें।
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