🔱सावन का पहला दिन - जब एक वर्ष की संचित आकांक्षाएँ, एक वर्ष की अटकी प्रार्थनाएँ, शिव-आह्वान के साथ आज पहली बार महादेव के द्वार पर दस्तक देने का क्षण है।और वह दस्तक सबसे उचित उस मंदिर में होनी चाहिए जो सावन के नाम का मूल है - सोमेश्वर महादेव तीर्थराज प्रयागराज।
🙏 सावन का नाम कहाँ से आया और सोमेश्वर उसका उत्तर क्यों है
🌿“सावन" नाम की उत्पत्ति हुई श्रवण नक्षत्र से और वह नक्षत्र चंद्रमा का है। इस माह का स्वामी चंद्रमा है। भगवान शिव "सोमनाथ" हैं सोम अर्थात् चंद्र के नाथ। सोमेश्वर का अर्थ है "सोम और ईश्वर का संगम" चंद्रदेव के ईश्वर शिव का वह मंदिर जो स्वयं चंद्रमा ने बनाया। सावन के पहले दिन सोम के माह की प्रतिपदा पर सोमेश्वर में रुद्राभिषेक कोई साधारण रुद्राभिषेक नहीं है।
🛕चंद्रमा के क्षय से आपके जीवन के क्षय तक यह मंदिर वही उपाय है
👑दक्ष ने चंद्रमा को श्रापित किया। उनका तेज, उनकी शक्ति घटने लगी। यही क्षय आज आपके जीवन में भी हो सकता है - स्वास्थ्य का, समृद्धि का, संबंध का, आत्मविश्वास का। भगवान विष्णु ने चंद्रमा को मार्ग दिखाया। प्रयागराज जाओ, यमुना के तट पर, शिव की आराधना करो। चंद्रमा ने इसी स्थान पर शिव की तपस्या की - शिव प्रकट हुए। क्षय दोष शांत हुआ।
🌕कृतज्ञ चंद्रमा ने यहाँ सोमेश्वर की स्थापना की। पद्म पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण तीनों इस तीर्थ की महिमा गाते हैं। आज भी यहाँ का त्रिशूल चंद्रमा की गति के अनुसार घूमता है यह चमत्कार वैज्ञानिकों के पास भी अनुत्तरित है।
🙏पहला दिन पहला संकल्प पूरे सावन का आशीर्वाद
🕉️सबका ध्यान पहले सोमवार पर होता है। लेकिन जो योग जानते हैं वे पहले दिन का महत्व समझते हैं। जैसे नए मंदिर की प्रथम पूजा सर्वाधिक फलदायी होती है वैसे ही सावन के पहले दिन का रुद्राभिषेक। सावन के पहले दिन का संकल्प पूरे सावन माह की भक्ति की आधारशिला बनता है। आप जो आज यहाँ प्रार्थना करते हैं वह प्रार्थना 30 दिन तक गूँजती रहती है।
🐚रुद्राभिषेक सावन में शिव की कृपा का सर्वाधिक त्वरित माध्यम
📜शास्त्र का वचन है रुतम् दुःखम् द्रावयति नाशयति इति रुद्रः रुद्र वे हैं जो समस्त दुखों को नष्ट करते हैं। रुद्राभिषेक में शिवलिंग का अभिषेक होता है गंगाजल, दूध, दही, घृत, मधु, शर्करा साथ में रुद्री मंत्रों का उच्चारण। सभी शिव-अनुष्ठानों में से रुद्राभिषेक सर्वाधिक शीघ्र फल देता है। शिव पुराण कहता है सावन में रुद्राभिषेक से काल-सर्प दोष, असाध्य रोग, आर्थिक बाधाएँ और ग्रह-दोष सब एकसाथ शांत होते हैं। तीर्थराज प्रयागराज में यही रुद्राभिषेक सामान्य स्थान से अनंतगुना फल देता है।
🌿यह सावन का पहला दिन है। वह द्वार खुल रहा है जो एक वर्ष से बंद था। चंद्रमा ने यहाँ आकर अपना क्षय मिटाया। आपके जीवन का जो भी क्षय है प्रथम दिन का यह रुद्राभिषेक उसका उत्तर है - अभी बुक करें।