शिव पुराण में एक बात कही गई है -निशीथ काल में शिव अपनी समाधि से जागते हैं। वे उन्हें ढूँढते हैं जो अभी भी जागे हुए हैं, जो उपस्थित हैं, जिन्होंने हार नहीं मानी और उस एक रात की उस एक घड़ी में किया अभिषेक - 1000 अभिषेकों के बराबर है।
🌙 सावन शिवरात्रि - महाशिवरात्रि से अलग क्यों है?
महाशिवरात्रि शिव की ब्रह्माण्डीय रात है - लिंगोद्भव, प्रथम तांडव। सावन शिवरात्रि की अपनी अलग पहचान है। यह वह रात है जब माँ पार्वती की वर्षों की तपस्या पूर्ण हुई। जब महादेव ने वैराग्य छोड़ा और शक्ति को अपनाया।सावन शिवरात्रि साल का यह दूसरा क्षण है जब सबकुछ दोबारा स्मरण किया जाता है। इस रात का अभिषेक = शिव + शक्ति दोनों की एकसाथ कृपा बरसती है।
🔱 चार मंदिर - सावन शिवरात्रि की कथा के चार अध्याय:
🛕सोमेश्वर महादेव प्रयागराज: जहाँ चंद्रमा को क्षय-रोग से मुक्ति मिली थी। सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी पर चाँद सबसे क्षीण होता है और सोमेश्वर उसी क्षण के सबसे पावन साक्षी हैं। अंधेरे में भी शिव की कृपा थमती नहीं।
🛕पशुपतिनाथ हरिद्वार: शिव के उस रूप का अभिषेक जो सभी प्राणियों के स्वामी हैं। जिस रात शिव-पार्वती एक हुए, उस रात के पशुपति का आशीर्वाद सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर बरसता है।
🛕नीलकंठेश्वर काशी: सावन = वह माह जब हलाहल पिया था। उनका कंठ नीला हुआ, देवों ने जल से शीतल किया। निशीथ काल में नीलकंठेश्वर को जल चढ़ाना उसी कृतज्ञता को पुनः जीवित करना है।
🛕गौरी केदारेश्वर काशी: अर्धनारीश्वर शिवलिंग। जहाँ शिव और पार्वती एक रूप में विराजते हैं। सावन शिवरात्रि की रात जब उनका मिलन हुआ।इस शिवलिंग पर जल का अभिषेक - उस दिव्य क्षण से जुड़ने का अनुभव है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे - 4 शिवलिंगों पर सावन शिवरात्रि निशीथ काल अभिषेक:
एक ही रात एक ही प्रहर में वो भी निशीथ काल के समय - प्रयागराज, हरिद्वार और काशी तीन शहरों के चार मंदिरों पर स्वयं जाकर अभिषेक करवाना असंभव है वो भी अपने व्यक्तिगत नाम से।
किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आपके नाम से चारों मंदिरों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित ठीक निशीथ काल में 12:02 से 12:48 के बीच जल-बेलपत्र महाभिषेक सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
✨वह घड़ी जब शिव सबसे अधिक जागृत होंगे - उस समय एकसाथ 4 शिवलिंग जहां साक्षात शिव का वास है और शिव विराजते हैं - वहाँ अभिषेक का मौक़ा न गवाएं।