हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी - हरि कृपा प्राप्त कर हिंदू नववर्ष की शुभ शुरुआत करें।
मथुरा-गया-हरिद्वार संयुक्त आशीष प्राप्ति - इन दिव्य स्थलों पर सेवा कर अपने पापों का पूर्ण विसर्जन करें।
📙 भविष्योत्तर पुराण में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि जो फल कठिन तपस्या से नहीं मिलता, वह हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी पापमोचिनी एकादशी पर सेवा करने से सुलभ हो जाता है। यह वह पावन तिथि है जब वर्ष भर के संचित दोषों को धोकर एक नए, पवित्र वर्ष की शुरुआत की जाती है।
🛕 तीन महातीर्थों का संगम: जहाँ सेवा बनती है मोक्ष का मार्ग
🔸धर्मारण्य वेदी - महाभारत के वन पर्व में उल्लेख है कि पांडव अपने वनवास और पश्चात तीर्थ यात्रा के दौरान गया की धर्मारण्य वेदी पर आए थे। धर्मराज युधिष्ठिर ने यहाँ विशेष अनुष्ठान कर अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। मान्यता है कि यहाँ की गई पंडा सेवा से वह पुण्य फल मिलता है जो पांडवों को अपने पितरों को मोक्ष दिलाने पर प्राप्त हुआ था। वर्ष की अंतिम एकादशी पर यहाँ सेवा अर्पित करने से आपके पितृ सात पीढ़ियों तक तृप्त होकर कुल को सौभाग्य का वरदान देते हैं।
🌊 गंगा घाट: स्कंद पुराण में हरिद्वार को मोक्ष द्वार कहा गया है। यहाँ माँ गंगा के सान्निध्य में विद्वान ब्राह्मणों की सेवा करना साक्षात श्रीहरि की सेवा के समान है। पापमोचिनी एकादशी पर की गई ब्राह्मण सेवा दरिद्रता का नाश करती है और व्यक्ति के अज्ञात पापों का शमन कर उसे ऐश्वर्य प्रदान करती है।
🌸 विश्राम घाट: यह वह दिव्य स्थान है जहाँ कंस वध के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं विश्राम किया था। वराह पुराण के अनुसार, विश्राम घाट पर की गई ब्राह्मण सेवा व्यक्ति के चित्त को शांत करती है। यहाँ सेवा करने से व्यक्ति सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाकर मानसिक परम शांति को प्राप्त करता है।
जब वर्ष समाप्त हो रहा हो, तब धर्मारण्य, गंगा और यमुना के तटों पर अपने नाम से सेवा अर्पित कर, नव वर्ष का स्वागत पुण्यमयी ऊर्जा के साथ करें!
⚠️ इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।







महासेवा एक अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी सेवा है, जिसका उल्लेख वेद-पुराणों में बार-बार हुआ है। जब किसी व्यक्ति द्वारा भोजन, वस्त्र एवं अन्न जैसे उच्चतम कार्य श्रद्धा और निष्काम भाव से किए जाते हैं, तो उसे महादान कहा जाता है। यह सेवा न केवल दाता के पापों का क्षय करता है, बल्कि पितृ, देवता और ऋषियों को संतुष्ट कर जन्म-जन्मांतर के कर्मबंधन से मुक्ति दिलाता है!
श्री मंदिर चढ़ावा सेवा ऐप के जरिए, आपका चढ़ावा अनुभवी पुरोहितों द्वारा श्रद्धा पूर्वक अर्पित किया जाएगा, जिसका वीडियो 24-48 घंटों में प्राप्त होगा, जिससे आपको दिव्य आशीर्वाद और समृद्धि मिलेगी।
हाँ, सेवा बुक करने के बाद आपको प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। आप अपनी बुकिंग के प्रमाणपत्र को 'सेवा' पेज पर 'आपकी बुकिंग्स' सेक्शन में देख सकते हैं।
सेवा बुकिंग के बाद आपको WhatsApp के माध्यम से अपडेट्स मिलते रहेंगे। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप के "सेवा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपनी सेवा की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
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