पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा
पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा

पितृ पक्ष प्रतिपदा तीर्थ राज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पंडा जी सेवा

पूर्णिमा पर पितृ लोक के द्वार खुलते हैं। प्रतिपदा पर पितृ भूलोक की ओर अपनी यात्रा जारी रखते हैं। इसी पवित्र दिन तीर्थराज त्रिवेणी संगम पर पंडा जी आपकी ओर से सेवा प्राप्त करने के लिए उपस्थित रहते हैं।

पंडा जी केवल किसी अनुष्ठान के लिए नियुक्त किए गए पुरोहित नहीं होते। वे उस विशिष्ट तीर्थ की जीवंत परंपरा के प्रतिनिधि होते हैं, जिसे समर्पित पंडितों की पीढ़ियों ने साधना और संरक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाया है। वे त्रिवेणी संगम की अपनी विशिष्ट मंत्र परंपरा, विधि-विधान और पीढ़ियों से संचित धार्मिक ज्ञान को अपने साथ आगे बढ़ाते हैं।

गरुड़ पुराण में श्राद्ध एवं पितृ कर्म के महत्व का वर्णन मिलता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, योग्य पंडा जी के माध्यम से किए गए श्राद्ध कर्म एवं अर्पण पितरों तक पहुँचते हैं — चाहे वे पितृ लोक में हों, किसी अन्य जन्म में हों या किसी अन्य अवस्था में। पंडा जी इस परंपरा द्वारा निर्धारित माध्यम हैं। प्रतिपदा के दिन तीर्थराज प्रयागराज में वे आपकी सेवा पूर्ण रूप से प्राप्त करते हैं।

🔱 त्रिवेणी संगम: प्रतिपदा के लिए यह स्थान क्यों?

त्रिवेणी संगम को तीर्थराज - सभी तीर्थों के राजा और मोक्ष का प्रथम द्वार माना जाता है। जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम होता है, वहाँ तीनों पवित्र नदियाँ आपकी सेवा को पितरों तक पहुँचाने वाली तीन पवित्र धाराओं का प्रतीक बनती हैं।

अग्नि पुराण में प्रयागराज में किए गए पितृ कर्म से अक्षय पुण्य की प्राप्ति का वर्णन मिलता है, ऐसा पुण्य जो क्षीण नहीं होता और पीढ़ियों तक बना रहता है। यहाँ की गई सेवा समय के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि चिरस्थायी मानी जाती है।

प्रतिपदा कृष्ण पक्ष की पहली तिथि है। मान्यता है कि इसी दिन पितृ चंद्रलोक से प्रस्थान कर मर्त्य लोक की ओर अपनी यात्रा जारी रखते हैं। इस पवित्र तिथि पर तीर्थराज में पंडा जी द्वारा आपकी सेवा संपन्न किए जाने से आपकी श्रद्धा उस पवित्र संगम तक पहुँचती है, जहाँ तीनों पवित्र नदियाँ एक साथ मिलती हैं और जहाँ पितृ कर्म की प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है।

📱 यह सेवा कैसे पूरी होगी?
श्री मंदिर के माध्यम से प्रतिपदा के दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर पंडा जी आपकी सेवा प्राप्त करेंगे और विधि-विधान के अनुसार उसे संपन्न करेंगे। सेवा का वीडियो 24–48 घंटे के भीतर आपको प्राप्त होगा।

यह बुकिंग एक सामूहिक सेवा का संकल्प है, जिसे इसमें भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता सार्थक बनाती है। यह किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सेवा न होकर एक साझा योगदान है, जो एक उच्च उद्देश्य के लिए एक साथ आता है। इस सामूहिक सहभागिता के माध्यम से हम इस पवित्र पहल को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में सक्षम होते हैं।
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