महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
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महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा
महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा

महालया सर्व पितृ अमावस्या सप्त मोक्ष पुरी 21 ब्राह्मण सेवा

“अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका पुरी। द्वारावती चैव सप्तैते मोक्षदायिकाः।”
प्राचीन काल से यह मान्यता चली आ रही है कि ये सात पवित्र नगरी मोक्ष प्रदान करने की विशेष शक्ति रखती हैं। यहाँ की गई सेवा को सामान्य तीर्थों की तुलना में अधिक प्रभावशाली माना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम और सभी पितरों के लिए समर्पित दिन है। इस दिन प्रत्येक पितर को एक ही संकल्प में शामिल करते हुए, आपके नाम से इन सभी 7 मोक्ष पुरियों में एक साथ 21 ब्राह्मणों के लिए सेवा की जाएगी।

🔱 सप्त मोक्ष पुरियाँ - मोक्ष के सात पवित्र द्वार
काशी
अविमुक्त काशी वह नगरी है जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते। यहाँ तारक मंत्र निरंतर गूँजता रहने की मान्यता है और भगवान शिव प्रत्येक प्रस्थान करती आत्मा के कानों में यह मंत्र सुनाते हैं। काशी में की गई ब्राह्मण सेवा आपके संकल्प का कव्य उस पवित्र नगरी के माध्यम से पितरों तक पहुँचने की कामना करती है, जहाँ मुक्ति को किसी अंतिम स्थान के बजाय एक स्थायी अवस्था के रूप में माना जाता है।
हरिद्वार
वह पवित्र द्वार जहाँ माँ गंगा पहली बार मैदानी धरती को स्पर्श करती हैं। भगीरथ की वर्षों की तपस्या के बाद माँ गंगा ने उनके 60,000 पितरों को एक ही दिव्य कृपा से मुक्ति प्रदान की थी। हरिद्वार में की गई ब्राह्मण सेवा उस पवित्र जलधारा से जुड़ती है, जिसने एक वंशज के प्रेम और संकल्प से पूरी पितृ पीढ़ी को मुक्ति प्रदान की।
अयोध्या
राम राज्य की पवित्र नगरी, जहाँ भगवान राम को सर्वोच्च पितृ भक्ति के आदर्श के रूप में स्मरण किया जाता है। परंपरा में भगवान राम द्वारा अपने पितरों के लिए श्राद्ध किए जाने और अपनी पृथ्वी की यात्रा के अंत में सरयू की ओर लौटने का वर्णन मिलता है। अयोध्या में की गई ब्राह्मण सेवा आपकी सेवा को उस नगरी से जोड़ती है, जो पितृ भक्ति की महान परंपरा का आशीर्वाद समेटे हुए है।
मथुरा
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि, जिन्हें भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार के रूप में स्मरण किया जाता है। श्रीकृष्ण ने बताया कि आत्मा न जन्म लेती है और न कभी मरती है। मथुरा में की गई ब्राह्मण सेवा आपकी सेवा को उस पावन नगरी से जोड़ती है, जहाँ जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अवतार लिया।
उज्जैन
उज्जैन भगवान महाकाल की नगरी है, जहाँ भगवान शिव को स्वयं काल के अधिपति के रूप में पूजा जाता है। यहाँ स्थित दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग दक्षिण दिशा की ओर मुख करता है, जिसे पितृ लोक की दिशा से जोड़ा जाता है। उज्जैन में की गई ब्राह्मण सेवा भगवान महाकाल की उस दिव्य उपस्थिति के साक्षी में की जाती है, जो आत्मा की समय के पार की यात्रा पर भी अपना अधिकार रखते हैं।
कांचीपुरम
कांचीपुरम की विशेषता यह है कि यह शिव कांचीपुरम और विष्णु कांचीपुरम, दोनों पवित्र परंपराओं से जुड़ी है। एक ही नगरी में भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा का संगम माना जाता है। यहाँ की ब्राह्मण सेवा कर्म बंधनों का नाश करने वाले भगवान शिव और मोक्ष प्रदान करने वाले भगवान विष्णु, दोनों की कृपा की कामना से की जाती है।
द्वारका
धरती पर वैकुंठ के रूप में मानी जाने वाली द्वारका वह पवित्र नगरी है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने राज्य किया और भगवान विष्णु की मोक्षदायिनी उपस्थिति से इसे जोड़ा जाता है। द्वारका में की गई ब्राह्मण सेवा भगवान विष्णु की इस पावन नगरी में की जाती है, जिसे परंपरा में उस दिव्य लोक के सबसे निकट माना जाता है जहाँ मुक्त आत्माएँ परम गति प्राप्त करती हैं।

श्री मंदिर के माध्यम से महालया सर्व पितृ अमावस्या पर आपके नाम से सभी सप्त मोक्ष पुरियों में एक साथ 21 ब्राह्मणों के लिए सेवा की जाएगी। इसका वीडियो आपको 24–48 घंटे के भीतर प्राप्त होगा।
यह बुकिंग एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है, जिसे इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सार्थक बनाती है। यह केवल किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सेवा नहीं, बल्कि एक साझा योगदान है, जो एक उच्च उद्देश्य के लिए एक साथ जुड़ता है। इस सामूहिक सेवा के माध्यम से हम इस पवित्र पहल को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में सक्षम होते हैं।
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