पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ

पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पितृ दोष शांति पंच महायज्ञ

हमारे ऋषियों ने कहा: एक मनुष्य जन्म लेते ही पाँच प्रकार के ऋणों में बँध जाता है। ऋषियों का ऋण ज्ञान और शास्त्र के लिए। देवताओं का ऋण सृष्टि के संचालन के लिए है। पितरों का ऋण जीवन देने के लिए। मनुष्यों का ऋण समाज के लिए और समस्त प्राणियों का ऋण सह-अस्तित्व के लिए।जिन्हें चुकाने के लिए पितृपक्ष से उत्तम कोई और समय नहीं है।
इन पाँचों ऋणों को चुकाने के लिए ऋषियों ने पाँच महायज्ञ निर्धारित किए। जब जीवन की आपाधापी में ये यज्ञ पीढ़ियों तक नहीं हो पाते - पितृ दोष उत्पन्न होता है।
पितृ दोष - गरुड़ पुराण का गहरा सत्य
गरुड़ पुराण (प्रेत खण्ड) का सिद्धान्त: पितर किसी एक कारण से नहीं, पाँच भिन्न स्थितियों में पीड़ित हो सकते हैं। वे भूखे-प्यासे हो सकते हैं, अकेले और अंधकार में हो सकते हैं, पाप के बोझ से दबे हो सकते हैं, या पशु योनि में जन्मे हो सकते हैं। यही कारण है कि केवल एक उपाय, चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, पितृ दोष का पूर्ण निवारण नहीं करता। पंच यज्ञ सेवा पितृ दोष की पाँचों जड़ें एक साथ काटती है।
✦ पञ्च यज्ञ - पितरों तक पहुँचने के पाँच पावन मार्ग
1. ब्रह्म यज्ञ: श्री दीर्घ विष्णु मंदिर, गया
विष्णु सहस्रनाम पाठ: जो पितर अज्ञान के अंधकार में हैं, ब्रह्म यज्ञ (शास्त्र-पाठ) ज्ञान का प्रकाश उन तक भेजता है।
2. देव यज्ञ: धर्मारण्य वेदी, गया
हवन आहुति: जो पितर अपने पाप-कर्मों के बोझ से दबे हैं, अग्निहोत्र उनके कर्म-बोझ को भस्म करता है। धर्मारण्य = 'धर्म का वन' गया के 45 पावन पिण्ड-स्थानों में से एक है, जहां पितरों को संपूर्ण मोक्ष मिलता है।
3. पितृ यज्ञ: त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
पितृ तर्पण: जो पितर पितृ लोक में सूक्ष्म तृष्णा से पीड़ित हैं, तिल और जल का तर्पण उनकी प्यास बुझाता है। अग्नि पुराण: प्रयागराज में पुण्य 'अक्षय' - कभी नष्ट नहीं होता।
4. मनुष्य यज्ञ: गंगा घाट, हरिद्वार
भोजन सेवा: जो पितर मनुष्य योनि में दरिद्र होकर जन्मे हैं, भोजन सेवा सीधे उन तक पहुँचती है। गरुड़ पुराण: भूखे और निर्धन को खिलाना = पितरों को खिलाना है।
5. भूत यज्ञ: श्री धाम गौशाला, मथुरा
गौ सेवा: जो पितर तिर्यक (पशु) योनि में जन्मे हैं, गौ सेवा सीधे उन तक पहुँचती है। गरुड़ पुराण: "दानानामपि सर्वेषां गवां दानं प्रशस्यते" - सभी दानों में गौ-दान सर्वश्रेष्ठ। गौ माता की सेवा ही वैतरणी नदी पार कराने का माध्यम है।
इस पंच यज्ञ का केवल एक ही उदेश्य है, "ये के चास्मत्कुले जाता अपुत्रा गोत्रविग्रहाः। ते गृह्णन्तु मया दत्तं..." अर्थात्: मेरे कुल में जो भी हुए ज्ञात और अज्ञात वे सब इस अर्पण को ग्रहण करें।पञ्च यज्ञ सेवा इस प्रतिज्ञा को साकार करती है, आपके पितर चाहे कहीं भी हों, किसी भी रूप में हों - यह सेवा उन तक पहुँचती है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 5 तीर्थों पर पञ्च यज्ञ:
एक ही दिन गया (दो स्थानों पर), प्रयागराज, हरिद्वार और मथुरा - पाँच स्थानों पर पाँच यज्ञ करवाना किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे यह पंच यज्ञ सेवा करवा सकते हैं। प्रत्येक स्थान के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से यज्ञ सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 पितृ पक्ष के इस प्रथम दिन इस पञ्च यज्ञ सेवा से पाँचों पितृ-ऋणों को एकसाथ चुकाएँ। अपने पितरों तक चाहे वे कहीं भी हों, किसी भी रूप में हों - अपना प्रेम और अर्पण पहुँचाएँ।
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