🔥✨‘शक्ति-भैरव योग’ में संयुक्त हवन आहुति। शक्ति (माँ बगलामुखी) बिना भैरव के अधूरी है और भैरव बिना शक्ति के निष्क्रिय - जब दोनों की एक साथ आराधना होती है, तो वह शक्ति जाग्रत होती है जिसे शास्त्रों में ‘महासिद्धि’ कहा गया है।
सावन दुर्गाष्टमी - यह तिथि क्यों सबसे शक्तिशाली है?
सावन माह में संपूर्ण सृष्टि पर शिवजी का राज्यकाल होता है और उस समय उनके सभी अवतारों में सबसे रौद्र काल भैरव की रक्षक शक्तियाँ सबसे जागृत होती है। इसके अलावा सावन माह की शुक्ल पक्ष की दुर्गाष्टमी होने के कारण इस समय दस महाविद्याओं में सर्वशक्तिशाली अष्टम महाविद्या माँ बगलामुखी की शक्तियाँ भी अपने चरम पर होती है और यह दोनों ही साथ मिलकर साल का सबसे शक्तिशाली शक्ति-भैरव योग बनाते हैं और इन दो शक्तियों का संगम ‘महासिद्धि’ का द्वार खोलता है।
दो प्रकार की आहुति - दो शक्तियाँ
1. काले तिल की आहुति - विक्रांत भैरव मंदिर, उज्जैन: महाकाल की पवित्र नगरी में स्थित विक्रांत भैरव मंदिर अत्यंत सिद्ध और जाग्रत है। काल भैरव साक्षात् शिव का उग्र रूप हैं। आहुति से शत्रुओं का सम्पूर्ण विनाश, काले जादू का नाश, राहु-केतु दोष और शनि-पीड़ा का शमन होता है।
2. पीली सरसों की आहुति - माँ बगलामुखी मंदिर, हरिद्वार: गंगा तट पर स्थित इस सिद्ध पीठ। आहुति से शत्रुओं की वाणी स्तम्भित होती है, उनके षड्यंत्र विफल होते हैं, नज़र दोष जलकर नष्ट होता है और जीवन में धन-सम्पत्ति की रुकावटें दूर होती हैं।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे दोनों सिद्ध मंदिरों में आहुति
सावन दुर्गाष्टमी के दिन एक साथ उज्जैन और हरिद्वार जाकर हवन करवाना असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे दोनों सिद्ध मंदिरों में अपने नाम और गोत्र से आहुति डलवा सकते हैं। विक्रांत भैरव मंदिर के पुजारी काले तिल से और माँ बगलामुखी मंदिर के पुरोहित पीली सरसों से आहुति देंगे। दोनों हवनों का वीडियो प्रमाण आपको भेजा जाएगा।
🙏सावन दुर्गाष्टमी पर शक्ति-भैरव योग का यह दुर्लभ संगम बार-बार नहीं आता। शक्ति बिना भैरव अधूरी है, भैरव बिना शक्ति निष्क्रिय - दोनों की संयुक्त आहुति से ही ‘महासिद्धि’ प्राप्त होती है। अभी बुक करें!