पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा

पितृ पक्ष श्राद्ध गया जी पितृ शांति ब्राह्मण महासेवा

पितृ पक्ष - वह पवित्र पक्ष जब हमारे पितर इस लोक के सर्वाधिक निकट आते हैं - अपने वंशजों के स्मरण की प्रतीक्षा में। इन दिनों में गया जी में की जाने वाली प्रत्येक सेवा - ब्राह्मणों के हाथों से किया जाने वाला प्रत्येक अर्पण - किसी भी अन्य समय की तुलना में आपके पितरों तक अधिक शीघ्र से पहुँचता है।

गया क्यों? - क्योंकि गया में पितरों की मुक्ति शास्त्र-प्रमाणित है
वायु पुराण की घोषणा है - गया में श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। गरुड़ पुराण कहता है - गया में श्राद्ध करने से जीवित वंशज को अपने पितरों को मुक्ति देने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। यही वह अतुलनीय महिमा है जो गया को सम्पूर्ण सनातन धर्म का सर्वोच्च पितृ तीर्थ बनाती है।

गया ब्राह्मण - 5,000 वर्ष पुरानी अखण्ड परम्परा के जीवित प्रतिनिधि
गया के ब्राह्मण साधारण पुरोहित नहीं हैं। ये पितृ सेवक हैं - पितरों के पवित्र सेवक - इस लोक और पितृ लोक के बीच का जीवित और अखण्ड सेतु। वैदिक काल से इनकी वंश-परम्परा निर्बाध रूप से चलती आई है। प्रत्येक गया ब्राह्मण परिवार पीढ़ियों से भारत के एक विशेष क्षेत्र और गोत्र के परिवारों की सेवा करता आया है - यह सम्बन्ध पुरोहित और यजमान का नहीं, यह पितृ-संरक्षक और पितृ-वंशज के बीच का अनादि अनुबन्ध है। जब गया ब्राह्मण आपके नाम और गोत्र का संकल्प लेते हैं - वे केवल शब्द नहीं बोलते। वे पाँच हज़ार वर्षों से पवित्र रखे गए उस सम्बन्ध को पुनः जागृत करते हैं।

जब आप ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं - आपके पितर तृप्त होते हैं
मनु स्मृति का विधान - "श्राद्ध में केवल सदाचारी, तपस्वी, वेदज्ञ, स्वाध्यायशील ब्राह्मण को ही भोजन कराना चाहिए - क्योंकि ऐसे ब्राह्मण में ही वह वैश्वानर-अग्नि प्रज्वलित होती है जो भोजन को सूक्ष्म रूप में परिवर्तित करके सीधे पितृ लोक तक पहुँचाती है।" जब आप ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं - आपके पितर पितृ लोक में तृप्त होते हैं। जब आप उन्हें वस्त्र देते हैं - आपके पितर परलोक में गरिमा से आच्छादित होते हैं। जब आप अनाज अर्पित करते हैं - आप उन्हें जीवन-शक्ति देते हैं। जब आप फल अर्पित करते हैं - आप उनके कर्म-बन्धनों को शिथिल करते हैं और उनका मोक्ष-पथ प्रशस्त करते हैं।

घर बैठे करें गया जी ब्राह्मण सेवा - श्री मंदिर के माध्यम से!
पितृ पक्ष में गया जी जाकर व्यक्तिगत रूप से ब्राह्मण सेवा करवाना प्रत्येक परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से आप - संसार में कहीं से भी - धर्मारण्य वेदी, गया के प्रमाणित ब्राह्मण जी से अपने नाम-गोत्र का संकल्प लेकर ब्राह्मण भोजन, वस्त्र दान, अनाज दान और फल सेवा करवा सकते हैं। सम्पूर्ण सेवा गया की प्रमाणित वंश-परम्परा के ब्राह्मणों द्वारा सम्पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न कराई जाएगी। सेवा का वीडियो प्रमाण 24 से 48 घंटों में आप तक पहुँचाया जाएगा।

इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक का नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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