नवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल विन्ध्याचल त्रिशक्ति महाचढ़ावा
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नवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल विन्ध्याचल त्रिशक्ति महाचढ़ावा
नवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल विन्ध्याचल त्रिशक्ति महाचढ़ावा
नवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल विन्ध्याचल त्रिशक्ति महाचढ़ावा

नवरात्रि महाष्टमी-महानवमी संधि काल विन्ध्याचल त्रिशक्ति महाचढ़ावा

नवरात्रि का सर्वोच्च शिखर: 48 मिनट का महा-संधि काल!
शास्त्रों में अष्टमी तिथि के अंत और नवमी तिथि के प्रारंभ के बीच के 48 मिनटों को 'संधि-काल' कहा गया है। यह वह प्रचंड क्षण है जब माता ने असुर चंड-मुंड के संहार हेतु अपनी भृकुटी से माँ चामुण्डा को प्रकट किया था। विंध्याचल धाम में इस समय ऊर्जा अपने सर्वोच्च शिखर पर होती है। इस 48 मिनट के चमत्कारिक काल में किया गया एक छोटा सा अर्पण या संकल्प जन्म-जन्मांतर के कष्ट मिटाकर अनंत गुणा पुण्य देता है।

श्री मंदिर के माध्यम से पहली बार, जागृत विंध्याचल धाम के 'शक्ति त्रिकोण' (माँ विंध्यवासिनी, काली खोह और अष्टभुजा देवी) में एक साथ दिव्य अर्पण करने का दुर्लभ अवसर!

📙 मार्कण्डेय पुराण का साक्षी 'शक्ति महा-त्रिकोण' 🔺
यह कोई साधारण तीर्थ नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का वह एकमात्र स्थान है जहाँ त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के सम्मिलित तेज से प्रकट हुई महाशक्ति निवास करती हैं। एक ही स्थान पर महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का एकसाथ विराजित होना इसे 'महा-त्रिकोण' बनाता है:

  • 🛕 माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ (महालक्ष्मी स्वरूप): महिषासुर वध के पश्चात माँ ने इसी जागृत स्थल पर विश्राम किया था। यहाँ अर्पण करने से दरिद्रता का समूल नाश होता है और अखंड धन-संपदा एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • 🛕 काली खोह मंदिर (महाकाली स्वरूप): रक्तबीज जैसे महा-असुर का संहार माँ ने यहीं किया था। यहाँ महाकाली को अर्पण करने से अज्ञात भय, शत्रुओं का प्रभाव और अकाल मृत्यु का संकट सदा के लिए भस्म हो जाता है।
  • 🛕 अष्टभुजा देवी मंदिर (महासरस्वती स्वरूप): यह वही योगमाया हैं जो कंस के हाथों से छूटकर आकाशगामी हुईं और यहाँ अपनी आठ भुजाओं के साथ प्रकट हुईं। यहाँ अर्पण से बुद्धि, विद्या, निर्णय क्षमता और करियर में अपार सफलता का वरदान मिलता है।

🙏 खाली हाथ न जाने दें यह महा-संयोग!
इस चैत्र नवरात्रि, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने सर्वोच्च बिंदु पर हो, तो स्वयं व अपने परिवार के नाम से इस शक्ति त्रिकोण में अर्पण अवश्य करें। जीवन में सुख, सुरक्षा और समृद्धि का अचूक आह्वान करें। (अभी अपना नाम दर्ज करें!)

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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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