पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा

पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 3 मोक्ष तीर्थ 101किलो खिचड़ी भोजन सेवा

🌕 पूर्णिमा - वह पल जब पितृ पक्ष का द्वार खुलता है और पितर पृथ्वी पर पहला कदम रखते हैं।
🗓️26 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा पितृ पक्ष का प्रथम क्षण। जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है, यमराज पितृ-लोक के द्वार खोलते हैं और पितर पृथ्वी के सर्वाधिक निकट आते हैं। यह पहला दिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि जो पहले स्वागत करे, वही सोलह दिनों का पूर्ण आशीर्वाद पाता है। और पूर्णिमा = पूर्ण चन्द्र = अधिकतम आध्यात्मिक ऊर्जा जब हर अर्पण, हर भोजन, हर कृत्य सर्वाधिक प्रभावशाली होता है।
🍚खिचड़ी - वह भोजन जो शास्त्र ने पितृ पक्ष के लिए निर्धारित किया:
खिचड़ी = चावल और दाल। श्राद्ध के शास्त्रसम्मत भोजन में ये दोनों सर्वप्रथम हैं। यह वह भोजन है जो शुद्धतम सात्विक है, बिना प्याज़, बिना लहसुन, बिना किसी तामसिक तत्व के। कर्ण को स्वर्ग में जो नहीं मिला- वह था वास्तविक भोजन, सरल, पोषण करने वाला, जीवन देने वाला। खिचड़ी ठीक यही है, जीवन का सार, सोने से अधिक मूल्यवान। जब किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति के पेट में यह खिचड़ी जाती है, गरुड़ पुराण कहता है - वह पोषण सूक्ष्म रूप में आपके पितरों तक पहुँचता है।
🌊तीन दिशाओं के तीन पवित्र जल - एक ही दिन आपके पितरों के लिए:
इस सेवा में तीन अलग-अलग पवित्र जलों के तट पर भोजन-सेवा होती है, 🛕रामेश्वरम - यह वह भूमि है जहाँ स्वयं भगवान राम ने अपने पिता महाराज दशरथ का श्राद्ध किया था और ऋषियों ने पुष्टि की कि राम के अर्पण से दशरथ समस्त पापों से मुक्त हुए और स्वर्ग को प्राप्त हुए।
🛕काशी - मोक्षदाता शिव की अपनी नगरी जहाँ माँ गंगा बहती है। "काशी में मृत्यु = मोक्ष।" शिव स्वयं मृत्यु के क्षण में तारक मंत्र देते हैं।
🛕गोकर्ण - जहाँ अरब सागर की लहरें भगवान महाबलेश्वर के चरणों को पखारती हैं। स्कन्द पुराण: "यहाँ एक दिन का पुण्य = एक लाख वर्ष का पुण्य।" कोटितीर्थ में सेवा करने से पीढ़ियों का उद्धार होता है।
🙏 राम ने रामेश्वरम में श्राद्ध किया उनके पिता को मोक्ष मिला। शिव ने काशी में तारक मंत्र दिया - असंख्य आत्माओं को मुक्ति मिली। गोकर्ण के कोटितीर्थ में एक सेवा से पीढ़ियाँ मुक्त हुईं। इस पूर्णिमा पर तीनों तीर्थों में 101 किलो खिचड़ी सेवा आपके पितरों को तृप्ति, आपके कुल को मोक्ष प्रदान कर सकती है - अभी बुक करें। इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।
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