🦅गरुड़ पुराण कहता है - "पितर पितृ पक्ष में अपने वंशजों के द्वार पर आते हैं और यदि तर्पण न मिले तो निराश लौट जाते हैं।" लेकिन आपके पितरों में जो अकाल-दिवंगत हुए, जिनकी माँ प्रतीक्षा में है, जो शस्त्र से गए, जो साधक थे, जो भक्त थे, जो अज्ञात अवस्था में हैं - क्या उन सबके लिए एक ही दिन का एक ही घाट पर तर्पण पर्याप्त है? शास्त्र कहते हैं: नहीं। पितृ पक्ष की 16 तिथियाँ एक जैसी नहीं हैं - प्रत्येक तिथि एक विशेष पितृ-वर्ग के लिए शास्त्रों द्वारा निर्धारित एक पृथक द्वार है। और प्रत्येक द्वार एक मोक्ष तीर्थ की शक्ति से खुलता है। जिसमें 6 तिथियाँ सबसे श्रेष्ठ है।
🪔प्रत्येक श्रेणी के पितरों के लिए शास्त्रों ने अलग तिथि और अलग तीर्थ निर्धारित किए हैं। नाना-नानी के लिए प्रतिपदा की विशेष तिथि है। अकाल मृत्यु और कठिन योनि में फँसे पितरों के लिए गोकर्ण की महिमा है। माताओं और मातृ पितरों के लिए मातृ नवमी निर्धारित है। प्रेत योनि में भटकने वाले पितरों के लिए हरिद्वार की गंगा उद्धारिणी है। और सर्व पितृ अमावस्या पर गया में समस्त पितर ज्ञात और अज्ञात एक साथ तृप्त होते हैं।
🛕6 तिथियाँ 6 मोक्ष तीर्थ - सर्व पितृ सम्पूर्ण आवरण:
🌊प्रतिपदा (26 सितंबर) - त्रिवेणी संगम, प्रयागराज: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का अक्षय संगम - पितृ पक्ष का प्रथम चरण। मत्स्य पुराण कहता है, "यहाँ किया हुआ तर्पण जन्म-जन्मांतर तक अक्षय पुण्य देता है।" नाना-नानी और नवागत पितरों के लिए यह तीर्थराज सर्वप्रथम है।
🌊अष्टमी (3 अक्टूबर) - गोकर्ण: दक्षिण भारत का सर्वोच्च पितृ मोक्ष क्षेत्र, जहाँ भगवान शिव का आत्म लिंग स्थापित है। स्कंद पुराण: "यहाँ एक दिन का पुण्य = एक लाख वर्ष का पुण्य।" कोटितीर्थ में तर्पण से कई पीढ़ियों को नरक से मुक्ति।
🌊मातृ नवमी (4 अक्टूबर) - अस्सी घाट, काशी: "काशी श्राद्ध के बिना गया श्राद्ध अधूरा है" - यह शास्त्रीय वचन है। अस्सी पर, मातृ नवमी के परम पवित्र दिन पर, माता, दादी, नानी समस्त मातृ-पितरों का तर्पण।यहाँ शिव स्वयं मृत्यु के क्षण में तारक मंत्र देकर प्रत्येक आत्मा को मोक्ष प्रदान करते हैं।
🌊दशमी (5 अक्टूबर) - शिप्रा घाट, उज्जैन: महाकाल की नगरी-जहाँ कालभी काल से परे है। भगवान राम ने स्वयं शिप्रा तट पर पिता दशरथ का तर्पण किया। स्कंद पुराण: "उज्जैन में श्राद्ध करने वाले के पितर स्वर्ग से कभी नहीं गिरते।"
🌊एकादशी (6 अक्टूबर) - गंगा घाट, हरिद्वार:पहाड़ों से उतरकर गंगा ने सर्वप्रथम यहाँ भागीरथ के 60,000 पितरों को मोक्ष दिया। एकादशी विष्णु का दिन और हरिद्वार विष्णु का धाम।इस दिन यह तर्पण - पितरों को संपूर्ण तृप्ति।
🌊सर्व पितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) - फल्गु नदी, गया: पृथ्वी का सर्वोच्च पितृ तीर्थ - गायासुर के शरीर पर भगवान विष्णु के चरण पड़े और यह भूमि 'विष्णुपदाक्षेत्र' बन गई। माता सीता ने यहाँ अकेले फल्गु नदी पर पिंडदान किया था। गरुड़ पुराण: "गया में पितृ कार्य करने से से पितर नरक से भी मुक्त होते हैं।"
🙏 पितृ पक्ष एक वर्ष में केवल एक बार आता है - जब आपके पितर आपकी प्रतीक्षा में हैं। 6 मोक्ष तीर्थों पर सर्व पितृ तृप्ति तर्पण संकल्प में सहभागी बनें और अपने समस्त पितरों को तृप्ति, शांति और मोक्ष प्रदान करें। अभी बुक करें।