यम द्वितीया सुरक्षा प्रदायक यम-यमुना चढ़ावा एवं सेवा
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यम द्वितीया सुरक्षा प्रदायक यम-यमुना चढ़ावा एवं सेवा

🪔✨ यम द्वितीया वह दिन जब यमराज ने साक्षात वरदान दिया: "इस दिन मेरी बहन के घर आने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त होगा!"
पुराणों में वर्णित वह दिव्य कथा जब यमराज और यमुना, दोनों सूर्यदेव की संतान, बचपन से बिछड़ गए। छाया (सौतेली माँ) के कठोर व्यवहार से दुखी यमुना ने घर छोड़ा और मथुरा के विश्राम घाट पर अपना निवास बनाया। यमराज यमलोक के कर्तव्यों में इतने व्यस्त थे कि वे अपनी बहन से मिलने न जा सके। पर एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज स्वयं विश्राम घाट पर यमुना के पास पहुँचे।
यमुना ने भाई का स्वागत किया आरती उतारी, माथे पर तिलक लगाया, प्रेम से भोजन कराया। तृप्त यमराज ने पूछा "बहन, कुछ माँग।" यमुना ने माँगा कोई भौतिक वस्तु नहीं बल्कि एक अटल वरदान:"हे भ्राता! जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक कराए वह अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो। और जो यमुना-जल में स्नान करे वह यमलोक के कष्ट से मुक्त हो।" यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया। वह वरदान आज भी उसी घाट पर, उसी मंदिर में जीवित है।
🏛️ भारत का एकमात्र यम-यमुना मंदिर 4,900 वर्ष प्राचीन:
श्री यमुना धर्मराज मंदिर, विश्राम घाट भारत का एकमात्र मंदिर है जहाँ यमराज (धर्मराज) और यमुना माता एकसाथ, भाई-बहन के रूप में, पूजित होते हैं। इस मंदिर की स्थापना श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने लगभग 4,900 वर्ष पूर्व की थी। काले पत्थर की प्रतिमाएं यमराज और यमुना दोनों के हाथ आशीर्वाद-मुद्रा में उठे हैं, मानो साक्षात कह रहे हों: "हम यहाँ हैं आपके भाई की रक्षा का वरदान हमारे पास है।"यह वही भूमि है जहाँ यमुना माता ने अपना घर बनाया था। यहाँ किया गया यम-यमुना चढ़ावा = यमराज के उस मूल वरदान को सक्रिय करना।
🤔 दीपावली पंचक का सर्वोच्च दिन क्यों है यह विशेष?
शास्त्र में दीपावली के पाँचों दिन अकाल मृत्यु से रक्षा की उपासना के दिन हैं: धनतेरस पर यम-दीपम, नरक चतुर्दशी पर प्रात:स्नान, दीपावली पर लक्ष्मी-पूजा, गोवर्धन पूजा और अब यम द्वितीया इस पंचक का समापन और सर्वोच्च दिन। इस दिन यमराज स्वयं सुलभ हैं क्योंकि इसी दिन वे अपनी बहन के पास आए थे। उनकी पूजा और चढ़ावा इस दिन सर्वाधिक फलदायी है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे विश्राम घाट पर यम-यमुना चढ़ावा:
मथुरा के विश्राम घाट पर जाकर यम द्वितीया के शुभ मुहूर्त में यम-यमुना को विधिवत चढ़ावा अर्पित करना सभी के लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम और गोत्र से श्री यमुना धर्मराज मंदिर में यम-यमुना चढ़ावा करवा सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से चढ़ावा और दीप दान सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 कार्तिक मास में दीपावली पंचक के अंतिम और सर्वोच्च दिन उसी विश्राम घाट पर जहाँ यमराज ने अपनी बहन को अकाल मृत्यु से रक्षा का वरदान दिया था आपके भाई की दीर्घायु और परिवार की रक्षा के लिए यम-यमुना चढ़ावा में सहभागी बनें। यह अवसर वर्ष में केवल एक बार आता है अभी बुक करें!
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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