अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक
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अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक
अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक
अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक
अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक

अधिक अमावस्या शनि क्रूर दृष्टि रक्षा पीपल वृक्ष दीपदान एवं तेल-अभिषेक

🪐3 वर्षों में केवल एक बार - अधिक मास की अमावस्या पर शनि की क्रूर दृष्टि से बचने का सबसे महान और दुर्लभ महायोग व्यर्थ न करें - पीपल वृक्ष पर दीपदान एवं शनि तेल महाभिषेक करें।
वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों में शनि देव को 'कर्मफलदाता' और 'न्यायाधीश' कहा गया है। जब कुंडली में शनि की वक्र (क्रूर) दृष्टि पड़ती है, या साढ़े साती, ढैय्या और महादशा चलती है, तो राजा को भी रंक बनते देर नहीं लगती।
🤔अधिक अमावस्या पर 'पीपल वृक्ष दीपदान और तेल-अभिषेक' ही क्यों?
ब्रह्म पुराण के अनुसार, अमावस्या तिथि शनि देव की जन्म तिथि भी मानी जाती है और यह उनके इष्ट देव (भगवान विष्णु/पुरुषोत्तम) का मास है।
🪔पीपल वृक्ष दीपदान: पद्म पुराण और स्कंद पुराण में स्पष्ट वर्णन है कि पीपल के वृक्ष में साक्षात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) का वास होता है। महर्षि पिप्पलाद के तप और शनि देव के वरदान के अनुसार, जो व्यक्ति अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की जड़ में सरसों के तेल का दीप प्रज्वलित करता है, शनि देव उसके सभी पूर्व जन्मों के पापों को क्षमा कर देते हैं और उसे अपनी क्रूर दृष्टि से हमेशा के लिए मुक्त कर देते हैं।
🪔तेल-अभिषेक: जब हनुमान जी ने रावण के चंगुल से शनि देव को मुक्त कराया था, तब उनके घावों पर सरसों का तेल लगाकर उनकी पीड़ा शांत की थी। तभी से शनि देव ने वरदान दिया कि जो भी मुझे सरसों का तेल अर्पित करेगा, मैं उसके जीवन के सभी कष्ट और पीड़ा हर लूँगा।
🛕उज्जैन का 'श्री नवग्रह शनि मंदिर' - पृथ्वी का नाभि केंद्र:
पूरे ब्रह्मांड में उज्जैन (उज्जयिनी) को काल की गणना का केंद्र और पृथ्वी की नाभि माना जाता है। यहाँ स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव अकेले नहीं, बल्कि नवग्रह मंडल के बिल्कुल 'केंद्र' (मध्य) में विराजमान हैं। यहाँ शनि देव अपनी उग्र अवस्था में नहीं, बल्कि राजा और कृपा-निधान के रूप में पूजे जाते हैं।
🙏हर 3 साल में आने वाले इस दुर्लभ पुरुषोत्तम अमावस्या महायोग को व्यर्थ न जाने दें। आज ही अपनी महासेवा बुक करें और शनि देव के प्रकोप को शांत कर राजयोग व सुरक्षा का कवच प्राप्त करें!
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