दर्श अमावस्या पर मोक्ष के 4 महातीर्थों गया, काशी, हरिद्वार और प्रयागराज में सामूहिक तर्पण!
पितृ दोष से मुक्ति और वंश की रक्षा: सात पीढ़ियों एवं वंश के उद्धार हेतु श्रद्धापूर्वक तर्पण करें।
📙 मत्स्य पुराण के अनुसार, दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा की किरणें नहीं होतीं, जिससे पितरों को अर्पण किया गया जल और भोजन सीधे उन तक पहुँचता है। इस दिन किया गया तर्पण न केवल सात पीढ़ियों को तृप्त करता है, बल्कि परिवार पर छाए पितृ दोष को भी शांत करता है।
🛕4 दिव्य पितृ तर्पण स्थल
🔸 फल्गु नदी (गया) - वायु पुराण साक्ष्य है कि माँ सीता ने स्वयं इसी तट पर महाराजा दशरथ का पिंडदान किया था। यहाँ फल्गु के जल से किया गया तर्पण पितरों को सीधे विष्णु लोक भेजता है।
🔸 अस्सी घाट (काशी) - स्कंद पुराण के अनुसार, काशी में पितृ तर्पण करनेवाले के पूर्वजों को साक्षात महादेव तारक मंत्र सुनाते हैं। पितरों को तर्पण उनके भटकाव को रोककर उन्हें परम शांति प्रदान करता है।
🔸 गंगा घाट (हरिद्वार) - इसे स्वर्ग का प्रवेश द्वार कहा जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, यहाँ तर्पण करने से पूर्वज वंश की वृद्धि और बच्चों की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते है।
🔸 त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) - गंगा, यमुना और सरस्वती के इस मिलन बिंदु पर कूर्म पुराण कहता है कि यहाँ किया गया तर्पण अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) हो जाता है। संगम की त्रिवेणी में श्रद्धा अर्पित करने से पितरों का आशीर्वाद कवच बनकर आपके परिवार की रक्षा करता है।
🌸 हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद के बिना जीवन में सफलता और शांति मिलना कठिन है। यदि आपके कार्यों में बाधाएं आ रही हैं या परिवार में क्लेश है, तो यह दर्श अमावस्या आपके लिए अपने पितरों से क्षमा माँगने और उन्हें संतुष्ट करने का श्रेष्ठ अवसर है।
इसलिए देरी न करें! अभी 4-दिव्य धाम पितृ तर्पण बुक करें।







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