श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर भारत के दो श्रेष्ठ मंदिर जहां कृष्ण वात्सल्य प्रेम भाव से स्वयं प्रकट हुए और बालकृष्ण के दर्शन दिये - वहीं उनके जन्मोत्सव महापर्व पर धूमधाम से मनाये जाने वाले महोत्सव में शामिल हो - घर बैठे उन्हें अपने प्रेम भरा श्रद्धा से अर्पण करें।
श्री राधा स्नेह बिहारी जी - श्री कृष्ण बालस्वरूप को भक्त की पीड़ा सुन प्रकट हुए:
श्री बाँके बिहारी मंदिर के शयन-भोग सेवाधिकारी श्री स्नेहीलाल गोस्वामी (स्वामी हरिदास जी की दसवीं पीढ़ी) के मन में एक अनूठी इच्छा जन्मी। वे प्रतिदिन बिहारी जी की सेवा करते थे, लेकिन उनके भीतर एक वात्सल्य-पीड़ा थी: "काश, बिहारी जी जैसा एक बालक मेरा होता - जिसे मैं स्वयं खिलाता, पालता, प्रेम करता।"तब अगले ही दिन उनकी गौशाला में उन्हें स्नेह बिहारी जी की प्रतिमा मिली जिसे किसी ने बनाया नहीं था - वो स्वयं प्रकट हुई थी।
श्री राधा स्नेह बिहारी जी महाराज वृंदावन के वे एकमात्र बिहारी जी जो किसी भक्त के वात्सल्य-भाव से
स्वयंप्रकट हुए।
कृष्ण मठ के बालकृष्ण - जो माँ देवकी के वात्सल्य प्रेम से प्रकट हुए:
देवकी माँ जिनकी कोख में श्री कृष्ण जन्मे, वह कभी अपने पुत्र का बचपन नहीं देख सकीं। कारागार में जन्म हुआ। तुरंत यशोदा माँ के पास भेज दिया गया। जब द्वारका में उन्होंने अपने पुत्र से वह बाल-स्वरूप माँगा भगवान ने मथन-दण्ड और रस्सी हाथ में लेकर वह रूप धारण किया। उसी रूप का विग्रह रुक्मिणी जी ने बनवाया और वही आज उडुपी में विराजमान है।
🌟 दोनों विग्रहों का एक ही मूल: वात्सल्य-भाव - भगवान को धरती पर बुलाने की शक्ति।
स्नेहीलाल गोस्वामी जी की संतान-कामना ने बिहारी जी को प्रकट किया। देवकी माँ के अतृप्त मातृत्व ने उडुपी का विग्रह उत्पन्न किया। यही दो मंदिर और केवल यही दो भारत में वे स्थान हैं जहाँ कृष्ण किसी की प्रेम-पुकार पर स्वयं आए।
🛕 उडुपी में 800 वर्षों की "अन्न ब्रह्म" परम्परा:
श्री माधवाचार्य जी ने उडुपी में एक सिद्धांत स्थापित किया: "अन्नदानम् ही पूजा है।" यहाँ का भोजन "अन्न ब्रह्म" है, साक्षात् परब्रह्म का स्वरूप। 800 वर्षों में एक दिन भी यह परम्परा नहीं रुकी। वेद: "अन्न दानं समं दानं त्रिलोकेषु न विद्यते।" तीनों लोकों में अन्नदानम् सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं हैं।
🏡 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे दोनों धामों में सेवा:
जन्माष्टमी पर एक ही दिन वृंदावन और उडुपी दोनों में जाकर चढ़ावा एवं सेवा करना असम्भव है। लेकिन श्री मंदिर ऐप के माध्यम से घर बैठे अपने नाम से दोनों मंदिरों में सेवा सम्पन्न करें। दोनों मंदिरों के प्रमाणित पुरोहित
विधि-विधान से आपके नाम से चढ़ावा करेंगे और कृष्ण मठ में अन्नदानम सेवा संपन्न करेंगे।दोनों से अलग-अलग वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 जन्माष्टमी वर्ष में एक बार आती है। वृंदावन के वात्सल्य-भाव से स्वयंप्रकट स्नेह बिहारी जी और उडुपी के देवकी माँ की मनोकामना से प्रकट श्री कृष्ण- इन दो विग्रहों में एक साथ सेवा का यह अवसर और कहीं नहीं मिलेगा। संतान-सुख, अन्नदानम् का बहु-पीढ़ी पुण्य और हर जीवन-बाधा से मुक्ति दोनों धामों की दोहरी कृपा एक संकल्प में। अभी बुक करें - दो धाम जन्माष्टमी महासेवा में सहभागी बनें!
इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।