चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प

चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा शक्तिपीठ 9 दिवसीय 8 शक्तिपीठ चढ़ावा संकल्प

श्री मंदिर पे पहली बार कालीघाट शक्तिपीठ भी उपलब्ध!

9 दिनों में 8 शक्तिपीठों की यात्रा: माँ के उन 8 विशिष्ट केंद्रों पर चढ़ावा जहाँ उनके पावन अंग गिरे थे।

📙 देवी भागवत पुराण के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के दिन आदि शक्ति के 9 दिव्य द्वारों के सक्रिय होने का समय हैं। शिव पुराण और तंत्र चूड़ामणि में वर्णित है कि जब महादेव सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित होकर जहाँ-जहाँ माँ के अंग गिरे, वहाँ 'शक्तिपीठ' स्थापित हुए। इस पावन चैत्र नवरात्रि, घर बैठे इन 9 अत्यंत जाग्रत शक्तिपीठों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

🛕 9 दिन: 9 पीठ और अखंड सौभाग्य का वरदान
🔸 प्रथम दिन - विंध्यवासिनी शक्तिपीठ: आदिशक्ति की स्वयंभू प्रतिमा के चरणों में अर्पण कर विजय आशीष पाएं।
🔸 दूसरा दिन - देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ: माता के पावन दक्षिण टखने के केंद्र पर चढ़ावा चढ़ाकर अपने जीवन के कठिन पथ को सुगम बनाएँ।
🔸 तीसरा दिन - त्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ: जहाँ माता का दाहिना पैर गिरा, वहाँ श्रद्धा अर्पित कर अखंड सौभाग्य का वरदान पाएँ।
🔸 चौथा दिन - अंबाबाई शक्तिपीठ: माता सती के दिव्य नेत्रों के स्थान पर चढ़ावा चढ़ाकर धन-समृद्धि की कृपा पाएं।
🔸 पाँचवा दिन - ललिता देवी शक्तिपीठ: माता की हस्तांगुलियों के पावन पीठ पर अर्पण कर कला, कौशल और कार्य-सिद्धि का सामर्थ्य प्राप्त करें।
🔸 छठा दिन - माँ उमा कात्यायनी शक्तिपीठ: जहाँ माता के केश गिरे थे, उस सिद्ध स्थान पर अर्पण कर समस्त पारिवारिक बाधाओं का निवारण करें।
🔸 सातवां दिन - तारापीठ शक्तिपीठ: माँ की तीसरी आँख के तारे के जाग्रत स्थान पर चढ़ावा कर मोक्ष और संकट-मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करें।
🔸 आठवां दिन - कालीघाट शक्तिपीठ: माता की पावन उँगलियों के स्थान पर अर्पण कर महाकाली के अभय कवच और शत्रु-विजय का आशीर्वाद लें।
🔸 नवां दिन - त्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ: नवरात्रि के समापन पर पुनः माता के चरणों में समर्पण कर नौ दिनों की साधना को पूर्णता और सिद्धि प्रदान करें।

ऐसा दिव्य एवं शक्तिशाली अवसर न गवाएं! माँ के हर स्वरूप के नाम का चढ़ावा बुक करें।

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