पितृ पक्ष अष्टमी काशी-गोकर्ण ज्ञात-अज्ञात पूर्वज मोक्ष प्राप्ति सेवा
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पितृ पक्ष अष्टमी काशी-गोकर्ण ज्ञात-अज्ञात पूर्वज मोक्ष प्राप्ति सेवा

🕉️✨प्रत्येक परिवार में दो प्रकार के पितर होते हैं, 'ज्ञात' जिनके नाम, तिथि और स्मृति परिवार में हैं।'अज्ञात' - जो पीढ़ियों के अंधकार में खो गए, जिनके नाम किसी को याद नहीं, जिनका कभी श्राद्ध नहीं हुआ। दोनों के लिए अलग-अलग शक्ति वाले क्षेत्र चाहिए। काशी की मोक्ष-शक्ति ज्ञात पितरों की मुक्ति देती है, वहीं गोकर्ण का आत्मलिंग अज्ञात और गहरे कर्म-पाप वाले पितरों को क्षमा करता है। यह सेवा दोनों को एक साथ शांति प्रदान करती है।
🕉️ अष्टमी - शिव की तिथि, शिव-भक्त पितरों का दिन:
पितृ पक्ष की अष्टमी आठवीं तिथि - वह तिथि है जो विशेषतः उनके लिए है जो अकाल में गए। जो शस्त्र से, अग्नि से, विद्युत् से, दुर्घटना में गए। इसके अलावा शिव पुराण में अष्टमी को शिव की विशेष तिथि कहा गया है। 'अष्ट' = 8 = शिव के अष्टमूर्ति रूप पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य और जीवात्मा। शिव सम्पूर्ण सृष्टि के 8 रूपों में विद्यमान हैं और आज उन्हीं शिव के 5 क्षेत्रों में उत्तर और दक्षिण भारत में एक साथ पितरों के लिए अनुष्ठान होगा। अष्टमी के दिन शिव-भक्त पितरों की विशेष शांति होती है।
🔱 काशी और गोकर्ण- दो नगर, मोक्षदाता शिव एवं संपूर्ण मोक्ष
🛕काशी जहाँ शिव ने वचन दिया है: सनातन धर्म में एक ऐसी नगरी है जहाँ मोक्ष की गारंटी है, भगवान शिव ने इसे कभी नहीं छोड़ा इसीलिए इसे अविमुक्त क्षेत्र कहते हैं। यहाँ जो भी प्राण त्यागता है - शिव स्वयं उसके कान में तारक मन्त्र फूँकते हैं और वह आत्मा मोक्ष को प्राप्त होती है।

🛕दक्षिण काशी गोकर्ण तीर्थक्षेत्र स्कन्द पुराण में गोकर्ण को सप्त मोक्षपुरियों के समकक्ष पुण्य देने वाला कहा गया है। यहाँ समुद्र और शिव एकसाथ हैं। जो पितर कर्म-बंधन में हैं, जिनके अधूरे कर्म उन्हें रोके हैं गोकर्ण का तटीय शिव-क्षेत्र उन्हें उस बंधन से मुक्त करता है।
🚩काशी और गोकर्ण मिलकर भारत के उत्तर और दक्षिण को शिव की दो भुजाओं की तरह घेरते हैं और जब ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए सेवा होती है तो इन दोनों की शक्ति मिलकर वह पहुँचती है जहाँ कोई एक अकेला नहीं पहुँच सकता।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे गोकर्ण और काशी एक ही दिन:
गोकर्ण (कर्नाटक) और काशी (उत्तर प्रदेश) इन दो महा-तीर्थों के पाँच पवित्र स्थलों पर एक ही दिन जाकर सेवा करवाना किसी भी व्यक्ति के लिए सर्वथा असम्भव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने और अपने पितरों के नाम और गोत्र से अष्टमी के दिन पाँचों स्थलों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित द्वारा सम्पूर्ण विधि-विधान से सेवा संपन्न करवा सकते हैं। जिसका वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏ज्ञात पूर्वज जिनके नाम याद हैं और अज्ञात पूर्वज जिनके नाम समय ने मिटा दिए - दोनों आज उसी शिव की प्रतीक्षा में हैं। काशी उन्हें मोक्ष देगी और गोकर्ण उन्हें क्षमा देगा। अभी बुक करें!
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