🌼सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर वहाँ माँ को संपूर्ण 16 शृंगार अर्पित करें - जहां से ये व्रत जन्मा! मंगला गौरी शक्तिपीठ।🌼
🔱 मंगला गौरी शक्तिपीठ क्यों है व्रत का मूलस्थान?
"मंगला गौरी" व्रत का नाम इसी शक्तिपीठ से आता है। अन्य मंदिरों में देवी की मूर्ति स्थापित है। यहाँ देवी स्वयं भूमि में हैं। 5 पुराण इसकी गवाही देते हैं: पद्म पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण, देवी भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण। यह 18 महाशक्तिपीठों में सम्मिलित है। जब आप यहाँ संकल्प लेते हैं: आप व्रत के उद्गम-स्थल पर होती हैं। जहाँ माँ का अंश पृथ्वी में विद्यमान है। "जहाँ देवी स्वयं विद्यमान हैं: वहाँ की चढ़ावा का फल अनंत।"
🌌 ब्रह्माण्ड का वह रहस्य जो केवल विद्वान जानते हैं
मंगला गौरी शक्तिपीठ वही भूमि है जहां माँ का स्तन गिरा था। स्तन = पोषण, ममता, जीवन-शक्ति। वह भूमि तब से: और अब तक: माँ की पोषण-शक्ति से आपूरित है। सृष्टि → पोषण → विनाश = ब्रह्माण्ड का सम्पूर्ण चक्र। और इस चक्र का मध्य-बिंदु है: मंगला गौरी शक्तिपीठ, गया। आप ब्रह्माण्ड की पोषण-शक्ति के केंद्र में संकल्प ले रहे हैं।
🏵️सावन का पहला मंगलवार: व्रत का सबसे शुभ आरंभ क्यों?
"व्रत का आरंभ सावन के पहले मंगलवार से करना सर्वोत्तम होता है" — यह स्कंद पुराण की परम्परा है। सावन माँ पार्वती का प्रिय मास है। मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है, जो विवाह और शक्ति का प्रतीक है। आज दोनों एकसाथ हैं: सावन का पहला मंगलवार। और यह व्रत यहाँ: उस शक्तिपीठ पर: जहाँ यह व्रत जन्मा था। यह संयोग नहीं: यह ब्रह्माण्ड
का आमंत्रण है।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे: मंगला गौरी शक्तिपीठ में सावन व्रत संकल्प🛕
किसी भी शक्तिपीठ में जाकर वहाँ अपने नाम से व्यक्तिगत चढ़ावा करवाना हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता हो पाता है ऐसे में श्री मंदिर आपको देता है यही ख़ास सुविधा। जिसमें सावन के प्रथम मंगला गौरी व्रत के दिन उसी के मूल स्थान पर आपके व्यक्तिगत नाम से विद्वान पुरोहितजी माँ के चरणों में चढ़ावा संपन्न करेंगे। जिसका वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
51 शक्तिपीठों में से वह एक: जहाँ देवी का पोषण-स्वरूप पृथ्वी में विद्यमान है। सावन के पहले मंगलवार पर मंगला गौरी व्रत के मूलस्थान पर अपना संकल्प अर्पित करें।