इस रमा एकादशी श्री राम की वनवास भूमि चित्रकूट - जहां उन्होंने वनवास के 11 वर्ष बितायें! वहाँ अपने नाम से श्री राम चरणों में अर्पण कर - सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करें।
🤔रमा एकादशी पर कामतानाथ चढ़ावा क्यों?
रमा एकादशी: "रमा" शब्द संस्कृत में माँ लक्ष्मी का नाम है। यह एकादशी विष्णु-राम और लक्ष्मी की एक साथ कृपा का दिन है, धन, इच्छापूर्ति और कर्म-शुद्धि का संगम। शास्त्रों में कहा गया है कि रमा एकादशी का व्रत हज़ारों अश्वमेध यज्ञों के समतुल्य फल देता है। अब सोचिए रमा एकादशी पर, राम के अपने 'कामद' स्थान पर चढ़ावा राम की स्वयं अपनी एकादशी पर, अपने कामद-रूप में, आपकी मनोकामना की प्रतीक्षा में बैठे हैं।
🛕श्री कामतानाथ मंदिर जहाँ लक्ष्मण जी ने राम-सीता के लिए "परम कुटीर" बनाई थी
चित्रकूट की यह पावन भूमि जहाँ श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने 14 वर्षों के वनवास में से 11 वर्ष बिताए। श्री कामतानाथ मंदिर उसी "परम कुटीर" के स्थान पर है, जिसे लक्ष्मण जी ने राम और सीता के लिए बनाया था। यह अयोध्या नहीं, यह वह घर है जहाँ राम ने सबसे अधिक समय बिताया। जाते जाते श्री राम ने अपने सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाले कामतनाथ स्वरूप को जगत कल्याण के लिए यहीं स्थापित कर दिया और यहाँ विराजमान कामतानाथ श्री राम का ही वह रूप है जिसे राम ने स्वयं इच्छा-पूर्ति का अधिकार दिया है।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे कामतानाथ को मनोकामना चढ़ावा करवाएं:
रमा एकादशी पर चित्रकूट जाकर कामतानाथ के चरणों में चढ़ावा करना हर भक्त के लिए संभव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे श्री कामतानाथ मंदिर, चित्रकूट में अपने नाम से चढ़ावा करवा सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से रमा एकादशी के सिद्ध मुहूर्त में यह पावन अर्पण सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24–48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏"कामद भे गिरि राम-प्रसादा" तुलसीदास का यह वचन आज भी उतना ही सत्य है। राम का वरदान आज भी जीवित है, कामतानाथ के रूप में चित्रकूट में। रमा एकादशी के दिन अपनी हर अधूरी इच्छा, पुरानी मन्नत, दीर्घकाल से प्रतीक्षित स्वप्न कामतानाथ के चरणों में रख दें और उसके सिद्ध होने का आशीर्वाद पाएं!