सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा
सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा
सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा
सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा
सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा
सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा

सावन शिवरात्रि - मंगला गौरी व्रत गौरी केदारेश्वर शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा

एक ऐसा दुर्लभ संयोग है जो वर्षों में एक बार आता है - सावन शिवरात्रि एवं मंगला गौरी व्रत दोनों साथ! माँ पार्वती की जीवन यात्रा के दो सबसे बड़े क्षण, यानी उनका कठोर तप और शिव के साथ उनका मिलन, एक ही दिन में समाहित हो रहा हैं।
मंगला गौरी व्रत (तप का दिन) + सावन शिवरात्रि (फल प्राप्ति का दिन)।
यह दुर्लभ संयोग तब बनता है जब सावन की कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार के दिन आती है। यह पार्वती जी की पूरी आध्यात्मिक यात्रा को एक ही दिन में दर्शाता है -तप से लेकर सिद्धि तक।
सावन के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत होता है - क्योंकि माँ पार्वती ने स्वयं सावन के मंगलवारों पर यह तप किया था। एकमात्र कामना लेकर। "शिव - मुझे स्वीकार करो।" हर मंगलवार - एक तप। हर तप में सिर्फ़ एक प्रार्थना। यही मंगला गौरी व्रत है - तप का दिन।भगवान से माँगने का दिन।
सावन की शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) - वह रात्रि जब शिव ने अंततः पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। वह रात्रि जब शिव-पार्वती का दिव्य विवाह सम्पन्न हुआ। "मैंने तुम्हें स्वीकार किया। तुम्हारा तप पूर्ण हुआ।" यह 'सावन शिवरात्रि' है फल का दिन। मिलन की रात्रि। पूर्णता का क्षण।
🛕श्री गौरी केदारेश्वर मंदिर, काशी: महिमा और महत्व
काशी का यह मंदिर अत्यंत अनन्य है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है "गौरी केदारेश्वर", यहाँ माँ गौरी और भगवान शिव एक ही स्वयंभू शिवलिंग में विराजमान हैं। यहाँ वे अलग-अलग नहीं बल्कि एक रूप में स्थित हैं।
काशी खंड में कहा गया है:"तुषाराद्रिम् समारुह्य केदारं वीक्ष्य यत्फलं, तत्फलं सप्तगुणितं काश्यां केदारदर्शने।" अर्थात् हिमालय के केदारनाथ के सात बार दर्शन करने से जो पुण्य मिलता है, वह काशी के केदारेश्वर के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।
🙏 वर्षों में एक बार आने वाले इस दुर्लभ संयोग को न चूकें! जब पार्वती का तप और उनका विवाह - एक ही दिन आएं - तब काशी के गौरी केदारेश्वर में शिव-पार्वती विवाह चढ़ावा में भाग लें। अपने नाम से अर्पण कर शिव-पार्वती विवाह महापर्व में शामिल हो।
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अपनी सेवा चुनें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook