नाग पंचमी सर्प राज नाग वासुकि दुग्धाभिषेक
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नाग पंचमी सर्प राज नाग वासुकि दुग्धाभिषेक
नाग पंचमी सर्प राज नाग वासुकि दुग्धाभिषेक

नाग पंचमी सर्प राज नाग वासुकि दुग्धाभिषेक

🐍🥛नाग पंचमी भारत के एकमात्र सर्पराज वासुकि धाम में दुग्धाभिषेक! वह पवित्र दिन जिसकी माँग स्वयं वासुकि ने रखी थी।
पूरे वर्ष में एक दिन ऐसा आता है, जब नाग-लोक में उत्सव मनाया जाता है, जब नाग देवता सर्वाधिक जागृत, सर्वाधिक प्रसन्न और भक्तों की पुकार सबसे शीघ्र सुनते हैं।यह दिन है नाग पंचमी।और इस दिन की उपासना का सर्वश्रेष्ठ स्थान है भारत का एकमात्र सर्पराज वासुकि धाम, प्रयागराज। वह तीर्थ जिसे वासुकि ने स्वयं चुना था। जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भागवत पुराण और महाभारत में है।
🐍🥛 नाग पंचमी - सर्पराज वासुकि का दुग्धाभिषेक ही क्यों?
ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जब वासुकि घायल हुए थे तब देवताओं ने उनकी चोट और घाव पर शीतल दूध चढ़ाया था जिसके बाद उन्हें शांति मिली। तभी से दूध का अर्पण नाग देवता वासुकि को अत्यंत प्रिय है।
इसके अलावा शास्त्रों में दूध को अमृत का स्थान प्राप्त है और नागों में विष होता है, जब आप नाग पंचमी जैसी शक्तिशाली तिथि पर नागों का अभिषेक उनके प्रिय दूध से करते हैं तो वह नाग दोषों के पाश को काट कर अमृत आशीर्वाद में बदल देता है।
सर्पराज वासुकि: नागों के महाराजाधिराज एवं महाबलिदानी
"वासुकि नागों में सर्वश्रेष्ठ हैं, अत्यंत शक्तिशाली, दीर्घकाय और सहनशील। उनके मस्तक पर 'नागमणि' विराजती है , वह दिव्य रत्न जो समस्त रोगों और संकटों का निवारण करने में समर्थ है।"
वासुकि की तीन दिव्य उपस्थितियाँ हैं:
पाताल-लोक में जहाँ वे समस्त नाग-जाति के महाराजाधिराज हैं।
वरुण के राज-प्रासाद में जल और वर्षा के देवता के सान्निध्य में।
कैलाश पर्वत पर महादेव के कण्ठ का दिव्य आभूषण बनकर।
पुराणों में लिखा है कि वासुकि ने भगवान शिव के धनुष 'पिनाक' की प्रत्यंचा (डोरी) बनकर त्रिपुरदहन में भी शिव की सहायता की थी। वह नाग जो शिव के अस्त्र का अंग बना, आभूषण है, नागों में श्रेष्ठ है और सभी सर्प दोषों के नाशक है उन्हें नमन करने का यह मौक़ा जानें न दें - नागराज वासुकि को अपने नाम से दूध अभिषेक कर उन्हें प्रसन्न करें।
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