🌞 साल में केवल एक बार आता है सूर्य कृपा का यह क्षण जब विश्वप्रसिद्ध छठ महापर्व पर श्रद्धालु त्याग, तप और आत्मशुद्धि के साथ सूर्य नारायण को धन्यवाद अर्पित करते हैं। इस दुर्लभ महा मुहूर्त पर देश के 3 प्रसिद्ध मंदिरों - गलता जी, देव सूर्य एवं दक्षिणार्क में अपने नाम से सूर्य देव को अर्पण करें!
भोर की पहली किरण जब क्षितिज को छूती है, करोड़ों श्रद्धालु शीतल जल में कमर तक खड़े, दोनों हाथों में सूप उठाए, आँखें बंद - यह दृश्य है छठ का। भारत का सबसे कठिन और सबसे पवित्र - 36 घंटे निर्जला, निराहार रहकर करने वाला महाव्रत! हिंदू शास्त्रों में वर्णित एकमात्र ऐसा पर्व जिसमें उगते हुए सूरज की आराधना करने से पहले डूबते सूरज की आराधना करना सिखाता है।
🌿 सूप चढ़ावा - छठ का सर्वोच्च अर्पण क्यों?
सूप केवल एक बाँस की टोकरी नहीं - वह है समर्पण का पात्र। ठेकुआ, फल, गन्ना, सिंघाड़ा, नारियल सब इसी सूप में सजाकर सूर्यदेव को अर्पित किए जाते हैं। ब्रह्म वैवर्त पुराण में छठी मैया को प्रकृति की षष्ठ शक्ति - बच्चों की रक्षक कहा गया है। वे सूर्यदेव की भगिनी हैं, महाभारत में वर्णित है कि सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे - इसी भक्ति से उन्हें अद्वितीय बल और दानशीलता का वरदान मिला।
माता सीता ने पुत्र-प्राप्ति की कामना से छठ व्रत किया और जुड़वाँ पुत्रों का सौभाग्य पाया। जैसे सूप अनाज को भूसे से पृथक करता है, वैसे ही सूर्यदेव अपनी किरणों से भक्त के जीवन के दुख और पाप को दूर कर जीवन को प्रकाश से भर देते हैं। इसीलिए सूप का अर्पण - जीवन का पूर्ण समर्पण है।
🛕 3 मंदिर क्यों? - त्रिकाल सूर्य कवच का रहस्य:
छठ पूजा विश्व का एकमात्र पर्व है जिसमें अस्ताचल (डूबते) और उदयाचल (उगते) - दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है। तीन जागृत सूर्य धामों पर सूप चढ़ावा का यह संयोजन सम्पूर्ण सूर्य दिवस को आच्छादित करता है
🌅श्री देव सूर्य मंदिर, देव (बिहार): पश्चिमाभिमुख, संध्याकाल के सूर्य का धाम। छठ पूजा का उद्गम-स्थान। स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने इसे एक ही रात में निर्मित किया।
☀️श्री दक्षिणार्क सूर्य मंदिर, गया (बिहार): 'दक्षिणार्क' दक्षिण दिशा के सूर्य - मध्याह्न का दिव्य तेज। पितृ-तीर्थ गया में स्थित, वायुपुराण में वर्णित। पितृ दोष एवं सूर्य दोष - दोनों का एक साथ निवारण।
🌄श्री गलताजी सूर्य देव मंदिर, जयपुर (राजस्थान): पूर्वाभिमुख - उषाकाल की प्रथम किरण का स्वागत करने वाला धाम। ऋषि गालव की तपोभूमि पर निर्मित!
तीनों मंदिर संध्या, मध्याह्न, उषा - त्रिकाल सूर्य कवच! जीवन के हर प्रहर में सूर्यदेव का दिव्य संरक्षण। संतान सुख, परिवार का आरोग्य, पितृ दोष, नज़र दोष, शत्रु बाधा - सभी एक अर्पण में शांत।
3 जागृत सूर्य धामों पर त्रिकाल सूप चढ़ावा में सहभागी बनें और संध्या, मध्याह्न, उषा - तीनों प्रहर का सूर्य कवच प्राप्त करें। अभी बुक करें!







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हाँ, चढ़ावा बुक करने के बाद आपको प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। आप अपनी बुकिंग के प्रमाणपत्र को 'चढ़ावा सेवा' पेज पर 'आपकी बुकिंग्स' में देख सकते हैं।
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