पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा
पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा

पितृ पक्ष तृतीया गयाजी मंगला गौरी शक्तिपीठ चढ़ावा एवं त्रिवेणी संगम जरूरतमंद महिला सेवा

पितृ पक्ष में हम पितरों के लिए तर्पण करते हैं, पिण्ड-दान करते हैं किन्तु एक प्रश्न हमेशा मन में रहता है: क्या यह पर्याप्त है? क्या हमारे पितरों को वह सब मिल रहा है जो उन्हें चाहिए?
सनातन धर्म कहता है पितरों की मुक्ति के लिए केवल तर्पण नहीं, दो शक्तियाँ एक साथ चाहिए। पहली आराधना, जो देवी के दिव्य-रूप से पितरों तक पहुँचती है। दूसरी सेवा, जो उसी देवी के मानव-रूप में की जाती है। जब दोनों एकसाथ होती हैं, तब पितृ-सेवा अपनी सम्पूर्णता को प्राप्त होती है।
🔱 श्री मंगला गौरी शक्तिपीठ, गया अष्टादश महाशक्तिपीठों में:
भारत के १८ महाशक्तिपीठों में मंगला गौरी का स्थान अद्वितीय है क्योंकि यह एकमात्र शक्तिपीठ है जो गया में है पृथ्वी के सर्वोच्च पितृ तीर्थ में। जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विच्छिन्न किया, तब उनका स्तन (स्तना) माँ के पोषण का, दूध का, प्रेम का प्रतीक इसी गया की भूमि पर पड़ा और मंगला गौरी शक्तिपीठ बना। यह दैवीय संयोग देखिए - जहाँ जीवित वंशज अपने मृत पितरों को पिंड (पोषण) देते हैं, उसी गया में माँ के स्तन का स्थान है - पोषण का मूल स्रोत।"जीवित माँ का पोषण" और "मृत पितर का पोषण" दोनों एक ही पावन भूमि पर। स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, अग्नि पुराण, देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण और वायु पुराण सभी में मंगला गौरी शक्तिपीठ की महिमा वर्णित है। माँ मंगला गौरी विशेषतः विवाह की रक्षा, सन्तान-प्राप्ति और परिवार के सौभाग्य की देवी हैं। मंगलवार को उनकी पूजा से मंगला दोष शान्त होता है।
🤲 त्रिवेणी संगम पर ज़रूरतमंद महिला सेवा का दिव्य विधान:
गरुड़ पुराण का वह वचन जो हर श्राद्ध-विधान में उद्धृत है: "अन्न दानं परं दानं, विद्या दानं ततः परम्। पितृ-ऋण-विमोचनं च, पिंड दानं विशिष्यते।।" "अन्नदान सर्वोच्च दान है और यह पितृ-ऋण से भी मुक्ति दिलाता है।" लेकिन तृतीया पर ज़रूरतमंद महिलाओं को अन्नदान का विशेष महत्व है, क्योंकि यह तिथि महिला पितरों की है, माँ मंगला गौरी की है। हर ज़रूरतमंद महिला में देवी का अंश है। उन्हें खिलाना = देवी को भोग = आपके पितरों की आत्मा तक प्रत्यक्ष पहुँचना।त्रिवेणी संगम, प्रयागराज पर यह सेवा और भी पुण्यदायी है क्योंकि शास्त्र कहते हैं: "पवित्र तीर्थों पर की गई सेवा सहस्र गुना फल देता है।" और तीर्थराज प्रयागराज = अक्षय पुण्य का स्थान।
🛕घर बैठे करें श्री मंदिर के माध्यम से
पितृ पक्ष तृतीया पर गया के मंगला गौरी शक्तिपीठ में चढ़ावा और त्रिवेणी संगम पर ज़रूरतमंद सेवा दोनों एक ही दिन, दो अलग स्थानों पर करवाना किसी भी परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से आप संसार में कहीं से भी अपने नाम का संकल्प लेकर दोनों स्थलों पर विधि-विधान से यह सम्पूर्ण सेवा सम्पन्न करवा सकते हैं। सेवा का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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