गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा
गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा
गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा
गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा
गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा
गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा

गोवर्धन पूजा वृंदावन गिरधारी श्री कृष्ण चढ़ावा, गौसेवा एवं ब्राह्मण सेवा

🏔️✨गोवर्धन पूजा वह एक दिन जब गिरिधर स्वयं आपका बोझ उठाने का वचन देते हैं!
भागवत पुराण की वह लीला आज भी ब्रज की मिट्टी में गूंजती है जिस दिन एक बालक ने समूचे ब्रज की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। इंद्र का प्रकोप था, मूसलाधार वर्षा थी, पर कान्हा अडिग थे। 7 दिन और 7 रातें न उन्होंने पर्वत छोड़ा, न अपने भक्तों को, न अपनी गौ माता को। जब सातवें दिन इंद्र का अभिमान टूटा और वर्षा रुकी तब इंद्र ने स्वयं कान्हा के चरणों में शीश नवाया। उस दिन से आज तक कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा यही संदेश देती है: जो गिरिधर की शरण में आता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
🤔 'त्रिसेवा महायोग' क्या है और गोवर्धन पूजा पर इसका क्या अर्थ है?
जब इंद्र का कोप शांत हुआ और सातवें दिन कान्हा ने पर्वत रखा तब आनंदित ब्रजवासियों ने तीन काम किए जो शास्त्रों में अमर हो गए: पहला गिरिराज को अन्नकूट अर्पित किया (क्योंकि कान्हा 7 दिन 7 रात भूखे रहे थे कान्हा 8 बार भोजन करते थे, 7×8 = 56 भोजन छूट गए इसीलिए 56 भोग अर्पित हुए और यही 'छप्पन भोग' की परम्परा बनी)। दूसरा गौ माता की पूजा की (जिनकी रक्षा के लिए ही कान्हा ने पर्वत उठाया था वे गायें जो कान्हा को सबसे प्रिय थीं)। तीसरा ब्राह्मणों को भोजन कराया (देव-ऋण और धर्म-ऋण चुकाने हेतु)। यही तीन सेवाएं मिलकर 'त्रिसेवा महायोग' निर्मित करती हैं और शास्त्र कहते हैं, जो भक्त इन तीनों का एक साथ अनुष्ठान करता है, उसे गोवर्धन धारण का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
🐄 गौसेवा क्यों और मथुरा में क्यों विशेष?
गोवर्धन पर्वत ने जिन गायों को घास दी, जिनकी रक्षा कान्हा ने अपनी उंगली पर पर्वत उठाकर की वेद और पुराण कहते हैं, उन गौ माता में 33 कोटि देव-देवियों का निवास है। देव इंद्र ने स्वयं कहा है 'समस्त तीर्थ गाय में निवास करते हैं।' जो गौ माता की सेवा करता है, वह एकसाथ समस्त देवताओं की आराधना करता है। और मथुरा में जो गोपाल कान्हा की स्वयं की जन्मभूमि है की गई गौसेवा का पुण्य सहस्रगुणित है। परमार्थ गौशाला में आपके नाम से की गई गौसेवा सीधे गोविंद के हृदय तक पहुँचती है।
🙏 कार्तिक मास में, दीपावली के ठीक अगले प्रभात, गोवर्धन पूजा पर गिरिधर गोपाल की शरण में आएं। घर बैठे त्रिसेवा महायोग में सहभागी बनें और गिरिराज का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें। यह अवसर वर्ष में केवल एक बार आता है अभी बुक करें!
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